Friday, 20 March 2020

बक्खाली : अतुलनीय खूबसूरती

   बक्खाली को प्रकृति का अति दर्शनीय शहर कहा जाये तो शायद कोेई अतिश्योक्ति न होगी। जी हां, बक्खाली की खूबसूरती अतुलनीय है।
   बक्खाली भारत के पश्चिम बंगाल का एक अति प्राचीन एवं खूबसूरत शहर है। यहां की प्राचीनता एवं प्राकृतिक सौन्दर्य देखते ही बनता है। तन एवं मन को प्रफुल्लित करने वाली आबोहवा एवं शानदार प्राकृतिक परिवेश पर्यटकों को मुग्ध कर लेते हैं।
   खास यह कि बक्खाली समुद्र तटों एवं धार्मिक स्थलों के लिए बेहद प्रसिद्ध है। लिहाजा पर्यटक बक्खाली की यात्रा कर समुद्र तटों का भरपूर आनन्द ले सकते हैं तो वहीं धर्म क्षेत्र का एक सुखद अहसास कर सकते हैं। बक्खाली वस्तुत: दो द्वीपों का मिला जुला शहर है। यह दो द्वीप हैं बक्खाली एवं फ्रेजरगंज।
   पश्चिम बंगाल के जिला दक्षिण 24 परगना का यह शहर बक्खाली विशिष्टताओं का एक खजाना है। लिहाजा पर्यटक यहां प्राकृतिक सौन्दर्य के हर आयाम का अहसास करते हैं। समुद्र की लहरों से खेलना, समुद्र तटों पर चहलकदमी करना एवं शीतलता संग बातें करना बेहद रोमांचक होता है। 
   सैरसपाटा का आनन्द लेना हो या मौसम संग अठखेलियां करनी हों तो बक्खाली से बेहतरीन कुछ नहीं होगा। वॉटर स्पोर्टस, साइकिलिंग एवं ट्रैकिंग के लिए बक्खाली आदर्श है। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से बहुत अधिक दूर न होने के कारण बक्खाली पर्यटकों का बेहद पसंदीदा माना जाता है। 
   इतना ही नहीं, बक्खाली एवं उसके आसपास आकर्षक स्थानों की एक लम्बी श्रंखला विद्यमान है। इनमें खास तौर से बक्खाली बीच, हेनरी द्वीप, जंबू द्वीप, बिशालक्ष्मी मंदिर एवं मगरमच्छ प्रजनन केन्द्र आदि इत्यादि बहुत कुछ दर्शनीय है। 
   बक्खाली बीच: बक्खाली भ्रमण का प्रारम्भ बक्खाली बीच से कर सकते हैं। बक्खाली बीच को शहर का मुख्य आकर्षण एवं मुख्य पर्यटन कह सकते हैं। शांत, शीतल एवं लम्बे समुद्र तट सैलानियों के बीच बेहद प्रसिद्ध हैं। पर्यटक यहां समुद्र संग खेलने का शौक पूरा कर सकते हैं। 
   हेनरी द्वीप: हेनरी द्वीप बेहद दर्शनीय एवं खूबसूरत है। लिहाजा पर्यटक द्वीप पर प्राकृतिक सौन्दर्य का भरपूर आनन्द ले सकते हैं। बक्खाली की यात्रा करने वाले सैलानियों के बीच हेनरी द्वीप बेहद प्रसिद्ध है। 
   प्राकृतिक मनोरंजन के अकूत संसाधन पर्यटकों को खुद ब खुद आकर्षित करते हैं। यह द्वीप न केवल पश्चिम बंगाल में बल्कि देश दुनिया में प्रसिद्ध है। यह द्वीप एकांत, नरम रेत, मनमोहक समुद्री तरंगों के लिए खास प्रसिद्ध है। इस द्वीप पर सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं।
   जंबू द्वीप: जंबू द्वीप को बक्खाली की शान एवं शोभा कहा जाये तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। हालांकि यह दूरस्थ द्वीप है। पर्यटक यहां मछली पकड़ने का शौक भी पूरा कर सकते हैं।
   बिशालक्ष्मी मंदिर: बिशालक्ष्मी मंदिर अति प्राचीन मंदिर है। धर्म एवं आध्यात्म का यह केन्द्र हिन्दुओं में अति पवित्र माना जाता है। सुन्दर लाल पत्थरों का बना यह मंदिर अति दर्शनीय है। सुन्दर घंटियों का वादन सुन कर श्रोता प्रफुल्लित हो उठते हैं। चौतरफा पर्यावरण का संवर्धन क्षेत्र को काफी कुछ विशिष्ट बना देता है। 
   मगरमच्छ प्रजनन केन्द्र: मगरमच्छ प्रजनन केन्द्र की सैर का भी आनन्द पर्यटक ले सकते हैं। खास यह कि पर्यटक यहां मगरमच्छ की असंख्य प्रजातियां देख सकते हैं। इसे मगरमच्छ का अद्वितीय चिड़ियाघर भी कह सकते हैं। 
   बक्खाली की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट नेताजी सुभाष चन्द्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट कोलकाता है। निकटतम रेलवे स्टेशन कोलकाता रेलवे जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी बक्खाली की यात्रा कर सकते हैं।
21.647170,88.259260

Tuesday, 14 January 2020

पांडिचेरी बीच: अतुलनीय प्राकृतिक सौन्दर्य

    पांडिचेरी बीच का प्राकृतिक सौन्दर्य अतुुलनीय कहा जाना चाहिए। जी हां, पांडिचेरी बीच का प्राकृतिक सौन्दर्य अद्भुत एवं विलक्षण है। 

    खास यह कि इसे प्रोमेनेड बीच के नाम से भी जाना एवं पहचाना जाता है। भारत के केन्द्र शासित पांडिचेरी का प्राकृतिक सौन्दर्य पर्यटकों के दिलों में छा जाता है। शायद इसीलिए पांडिचेरी वैश्विक पर्यटकों का बेहद पसंदीदा पर्यटन है। इस समुद्र तट को पांडिचेरी का मुख्य आकर्षण भी कह सकते हैं। 

   इस अति खूबसूरत बीच के अवशेष के रूप में रिपरैप शिलाखण्ड की समुद्री दीवार भी एक आकर्षण है। इस दीवार पर बना समुद्र तट भी अति दर्शनीय है। इसे ला फोक्स प्लेज कहा जाता है। इसका शाब्दिक अर्थ होता है 'नकली बीच"। पर्यटक ला फोक्स प्लेज पर दिन में मौज मस्ती कर सकते हैं। 

   समुद्र किनारे टहलने के लिए यह एक आदर्श स्थान है। करीब 1.5 किलोमीटर एरिया में फैला प्रोमेनेड बीच बेहद दर्शनीय होने के साथ ही पांडिचेरी का मुख्य आकर्षण भी है। 
   हालांकि पांडिचेरी में समुद्र तटों की एक लम्बी श्रंखला विद्यमान है। इन बेहतरीन समुद्र तटों में पैराडाइज तट, सेरेनिटी तट एवं आरोविले समुद्र तट आदि इत्यादि हैं। यहां की सुनहरी एवं चमकदार रेत के बीच अठखेलियां करना पर्यटकों को बेहद भाता है। 

   नारियल के शानदार वृक्षों की श्रंखला समुद्र तटों को आैर भी अधिक सुन्दर बना देती है। यंू कहें कि पांडिचेरी के समुद्र तट पर्यटकों के आनन्द को दोगुना कर देते हैं तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। अद्वितीय वास्तुकला के इस शहर के समुद्र तट पांडिचेरी की शोभा एवं शान हैं।

  अनूठी वास्तुकला से अति समृद्ध पांडिचेरी स्वादिष्ट भोजन-व्यंजन के लिए भी खास तौर से जाना एवं पहचाना जाता है। समुद्री भोज्य पदार्थों के साथ ही नारियल से बने भोज्य पदार्थ बेहद स्वादिष्ट एवं लजीज होते हैं। इस स्वाद को पर्यटक कभी भूल नहीं पाते। 

    हालांकि पांडिचेरी की भोजन संस्कृति पर तमिल प्रभाव दिखता है। भोजन एवं पाक कला के लिए खास तौर से भोज्य पदार्थों के लिए जाना एवं पहचाना जाने वाला पांडिचेरी अपनी भोज्य पदार्थ कला कौशल में नारियल उत्पाद के व्यंजनों की एक लम्बी श्रंखला रखता है। 

   वस्तुत: देखें तो पांडिचेरी अपने आगोश में खूबसूरती की विविधिता रखता है। खूबसूरती की यह विविधिता ही पर्यटकों को आकर्षित करती है। वैसे देखें तो पांडिचेरी के खास आकर्षण में बोटेनिकल गार्डेन, फ्रांस युद्ध स्मारक, अरबिंदो आश्रम, ओरोविले, सैक्रेड हार्ट चर्च आफ जीसस एवं पांडिचेरी संग्रहालय आदि इत्यादि हैं।
    बोटेनिकल गार्डेन: बोटेनिकल गार्डेन एवं एक्वैरियम पांडिचेरी की शान एवं शोभा हैं। वस्तुत: बोटेनिकल गार्डेन विदेशी पौधों का एक विशाल संग्रह क्षेत्र है। जीव विज्ञान के छात्रों एवं शोधार्थियों के लिए यह बेहद उपयोगी है। यह अद्भुत एवं विलक्षण गार्डेन बस स्टैण्ड के दक्षिणी द्वार के निकट स्थित है।

  करीब 22 एकड़ क्षेत्र में फैला बोटेनिकल गार्डेन पांडिचेरी का एक मुख्य आकर्षण है। एक्वैरियम में समुद्री जीवों की विविधिता दर्शनीय है। इसे पांडिचेरी का एक खास पर्यटन कहा जा सकता है।
  खास यह कि जलीय जीवन की यह एक अनोखी झलक है। बच्चों की ट्रेन, डांसिंग फव्वारा एवं कुछ दुर्लभ फव्वारा यहां की शान एवं शोभा हैं। 
   फ्रांस युद्ध स्मारक: फ्रांस युद्ध स्मारक प्रथम युद्ध में शहीद हुए युद्ध नायकों की स्मृति में बनवाया गया स्मारक है। वर्ष 1971 में बनवाया गया स्मारक बैस्टिल दिवस पर विशेष तौर से सजाया जाता है। इस दिवस को फ्रैंच शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है।    
   अरबिंदो आश्रम: अरबिंदो आश्रम की स्थापना 1926 में की गयी थी। अरबिंद घोष ने आश्रम की स्थापना की थी। आश्रम में एक विस्तृत पुस्तकालय भी है।

   ओरोविले: ओरोविले पांडिचेरी से कुछ दूर स्थित है। वस्तुत: इसे प्रात: काल का शहर कहा जाता है। यह एक ऐसा शहर है, जहां विभिन्न संस्कृतियां दर्शित हैं। 
   विशेषज्ञों की मानें तो ओरोविले में दुनिया के पचास से अधिक देशों के बाशिंदों के घर हैं। इसे व्यापक तौर पर एक वैश्विक शहर माना जाता है। ओरोविले सांस्कृतिक सद्भाव के लिए खास तौर से जाना एवं पहचाना जाता है। इस शहर का मुख्य आकर्षण मातृ मंदिर है। इसकी भव्यता दिव्यता पर्यटकों को आकर्षित करती है। 
   पांडिचेरी संग्रहालय: पांडिचेरी संग्रहालय में पांडिचेरी को देखा जा सकता है। इस संग्रहालय को शहर का मील का पत्थर भी कहा जा सकता है। इस संग्रहालय में असंख्य मूर्तियां, अरिकामेडु रोमन काल की असंख्य महत्वपूर्ण एवं पुरातात्विक वस्तुएं हैं। 
   खास यह है कि प्राचीनकाल की दुर्लभ कलाकृतियों का यह भण्डार है। खास यह कि सीपियों का यहां अद्भुत संग्रह है। भारती पार्क में स्थित पांडिचेरी संग्रहालय काफी कुछ अनोखा है।
    पांडिचेरी की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट चेन्नई एयरपोर्ट है। चेन्नई एयरपोर्ट से पांडिचेरी की दूरी करीब 135 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन मदुरै रेेलवे जंक्शन एवं चेन्नई रेलवे जंक्शन हैं। पर्यटक सड़़क मार्ग से भी पांडिचेरी की यात्रा कर सकते हैं।
11.941591,79.808311

Sunday, 5 January 2020

मुनरो द्वीप: इन्द्रधनुषी पर्यटन

    मुनरो द्वीप को इन्द्रधनुषी पर्यटन कहा जाना चाहिए। जी हां, मुनरो द्वीप का प्राकृतिक सौन्दर्य अद्भुत एवं विलक्षण है। वस्तुत: मुनरो द्वीप आठ छोटे द्वीपों का एक समूह अर्थात बड़ा द्वीप है। 

    भारत के केरल प्रांत के कोल्लम जिला का यह द्वीप अति दर्शनीय है। स्थानीयता में इसे मुनरो थुरूप भी कहा जाता है। छोटे-छोटे आठ द्वीपों का यह समूह जल पर्यटन के लिए खास तौर से जाना एवं पहचाना जाता है।

   खास यह है कि कोल्लम से करीब 27 किलोमीटर दूर स्थित मुनरो द्वीप की यात्रा जल परिवहन एवं सड़क परिवहन दोनो से ही की जा सकती है। वस्तुत: मुनरो द्वीप अष्टमुड़ी झील एवं कल्लड़ा नदी का संगम स्थल है। विशेषज्ञों की मानें तो इस अति दर्शनीय द्वीप की खोज एक ब्रिटिश अफसर ने की थी। 

   ब्रिटिश अफसर का नाम कर्नल जॉन मुनरो था। लिहाजा इस शानदार द्वीप को कर्नल मुनरो के नाम से जाना एवं पहचाना गया। कर्नल मुनरो ने इस क्षेेत्र में नहरों एवं अन्य संरचनाओंं का आकार प्रकार दिया था। 

   खास यह रहा कि ब्रिटिश अफसर मुनरो ने इलाके में बैकवाटर्स के मार्गों के एकीकरण में विशेष भूमिका का निर्वाह किया था। लिहाजा मुनरो द्वीप ने एक शानदार जल पर्यटन का स्वरूप अख्तियार किया। मुनरो द्वीप का प्राकृतिक सौन्दर्य देश विदेश के पर्यटकों को रोमांचित करता है। लिहाजा पर्यटन यहां के सौन्दर्य से खिचें चले आते हैं। 

   सैलानी मुनरो द्वीप का प्राकृतिक सौन्दर्य निहारने एक बार अवश्य आते हैं। मुनरो द्वीप की यात्रा के बाद पर्यटक यहां के रोमांच को जीवन पर्यंत भूल नहीं पाते हैं। खास यह कि इस सुन्दर द्वीप का धार्मिक महत्व भी है।

  इस द्वीप पर मुलाछत्रा एवं कल्लुविला अति दर्शनीय मंदिर हैं। एक प्राचीन चर्च भी इस द्वीप की शान एवं शोभा है। इस चर्च की संरचना 1878 में की गयी थी। 
   मुनरो द्वीप का एक विशेष स्थान पल्लीयाम थुरूथ अपनी सुन्दरता एवं शांति के लिए जाना एवं पहचाना जाता है। इसेे छुट्टियां मनाने के लिए एक आदर्श स्थान माना जाता है। नहरों एवं झीलों का यह संगम बेेहद सुन्दर है। 

    ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे पर्यटक स्वप्नलोक में विचरण कर रहे हों। मुनरो द्वीप पर दर्शनीय स्थलों की एक लम्बी श्रंखला विद्यमान है। चौतरफा नारियल के सुन्दर पेड़ों की श्रंखला मुनरो द्वीप की सुन्दरता में चार चांद लगा देती है। 

   खास यह कि नारियल के रेशों केे उद्योग के लिए मुनरो द्वीप खास तौर से प्रसिद्ध है। बैकवाटर्स की दृष्टि से देखें तो मुनरो द्वीप एक छिपा हुआ मोती है। खास तौर से ओणम पर नाव की दौड़ देखने वाली होती है। ऐसा प्रतीत होता है कि जल पर्यटन का शानदार श्रंगार किया गया हो। 

   ओणम पर मुनरो द्वीप किसी दुल्हन की भांति दिखता है। मुनरो द्वीप पर्यटन की अनूठी परिभाषा को रेखांकित करता है। द्वीप की शांत शीतलता पर्यटकों को प्रफुल्लित कर देेती है। 

    पर्यटक इस द्वीप पर नौकायन का भी भरपूर आनन्द ले सकते हैं। चाहे क्रूज की सवारी करनी हो या फिर नौका में द्वीप का भ्रमण करना हो या फिर जलक्रीड़ा का आनन्द लेना हो।

  मुनरो द्वीप आनन्द की हर सुखद अनुभूति प्रदान करता है। मुनरो द्वीप पर ठहरने के लिए आलीशान रिसार्ट एवं अतिथिगृह है। लिहाजा पर्यटक मुनरो द्वीप के रोमांच का भरपूर आनन्द ले सकते हैं।

   मुनरो द्वीप की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट तिरुवनंतपुरम इण्टरनेशनल एयरपोर्ट है। एयरपोर्ट से मुनरो द्वीप की दूरी करीब 84 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन कोल्लम रेलवे जंक्शन है। कोल्लम रेलवे स्टेशन से मुनरो द्वीप की दूरी करीब 27 किलोमीटर है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी मुनरो द्वीप की यात्रा कर सकते हैं।
8.973700,76.609220

Monday, 23 December 2019

कोझीकोड बीच: रोमांचक एहसास

   कोझीकोड बीच को प्रकृति का इन्द्रधनुषी आयाम कहा जाना चाहिए। कोझीकोड बीच शहरी भागदौड़ से पर्यटकों को एक शांत शीतल एवं मखमली स्पर्श का एहसास कराता है। 

   भारत के केरल के कालीकट का यह सुन्दर बीच देश दुनिया में खास प्रसिद्ध है। इसे केरल का एक आदर्श पर्यटन क्षेत्र माना जाता है। कोझीकोड बीच पर सूर्योदय एवं सूर्यास्त का लालित्य अति दर्शनीय होता है। 

   लिहाजा इस दर्शनीयता के लिए पर्यटकों का जमावड़ा लगता है। यूं कहें कि कोझीकोड बीच का सौन्दर्य पर्यटकों को लुभाता है तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। कोझीकोड बीच पर दक्षिण भारतीय संस्कृति पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती है।

   अरब सागर का यह समुद्र तट पर्यटकों को रोमांचित कर देता है। अरब सागर की शानदार लहरों से खेलना, जलक्रीड़ा करना, बीच की लहरों में स्नान करना आदि इत्यादि पर्यटकों को रोमांच से भर देता है। समुद्री हवाओं का आनन्द लेना हो तो कोझीकोड बीच की यात्रा का प्लान कर सकते हैं।

   कोझीकोड बीच की यात्रा केे साथ ही पर्यटक आसपास के इलाकों की यात्रा कर आनन्द की एक सुखद अनुभूति कर सकते हैं। कोझीकोड को वस्तुत: कालीकट के नाम से जाना एवं पहचाना जाता है। कोझीकोड की अपनी एक खास ऐतिहासिक, पौराणिक एवं सांस्कृतिक समृद्धता है। जिससे पर्यटक कोझीकोड की यात्रा पर खींचे चले आते हैं। 

   केरल के पूर्वी इलाके का कोझीकोड मसालों की उत्पादकता के लिए जाना एवं पहचाना जाता है। इसे मसालों की राजधानी के तौर पर दुनिया में देखा जाता है। चाय, काफी, काली मिर्च, नारियल आदि इत्यादि बहुत कुछ इस क्षेत्र की उत्पादकता में शामिल है।

    लिहाजा परिवेश मसालों की खूशबू से महकता रहता है। नारियल के स्वादिष्ट व्यंजन पर्यटकों को मुग्ध कर लेेते हैं। कालीकट का मालाबार खान पान के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। दम बिरयानी, कलममाकाया एवं चट्टी पथरी खास तौर से प्रसिद्ध हैं। कोझीकोड को दक्षिण भारत के आदर्श पर्यटन में शीर्ष पर गिना जाता है। 

   मानांचिरा स्क्वायर: मानांचिरा स्क्वायर कोझीकोड का एक मुख्य आकर्षण है। वस्तुत: यह एक अति दर्शनीय एवं खूबसूरत पूल है। इसका निर्माण राजा मानावेदावन ने किया था। 
  इसके आसपास प्राचीन मंदिर, पौराणिक इमारतें, चर्च आदि इत्यादि हैं। इसके अलावा संगीत मंच, खुला थियेटर एवं संगीतमय फव्वारा संचाचित है। लिहाजा पर्यटक भरपूर आनन्द ले सकते हैं। 
   नागों का मंदिर: नागों का मंदिर वस्तुत: भगवान शिव को समर्पित है। इसे कालीकट के प्राचीन मंदिरों में से एक माना जाता है। मंदिर की वास्तुकला दक्षिण भारतीय शैली पर आधारित है। गर्भगृह में दो फुट आकार का शिवलिंग प्रतिष्ठापित है। 
   कडलुंडी पक्षी अभयारण्य: कडलुंडी पक्षी अभयारण्य कोझीकोड की शान एवं शोभा है। पर्यटकों को यह रोमांच की सुखद अनुभूति कराता है। अरब सागर की ओर से आती कडलुंडी नदी के आसपास द्वीपों एवं पहाड़ियों पर स्थित कडलुंडी पक्षी अभयारण्य की सुन्दरता पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर लेती है।

  विभिन्न प्रजातियों के रंंगबिरंगे पक्षी इस अभयारण्य की शोभा हैं। पर्यटक यहां प्रकृति के करीब कुदरती खूबसूरती का एहसास कर सकते हैं। पक्षियों का कोलाहल-कलरव एक संगीतमय परिवेश बनाता है। यहां एक शानदार संग्रहालय भी है। 
   कालीपोयीका: कालीपोयीका वस्तुत: एक शानदार बैकवाटर्स है। पर्यटक कालीपोयीका में नौकायन का भरपूर आनन्द ले सकते हैं। नौकायन के लिए यह इलाका आदर्श माना जाता है। 
   रॉ बोटिंग, पैडल बोटिंग एवं क्रूज का आनन्द पर्यटक यहां ले सकते हैं। कालीकट से करीब दो किलोमीटर दूर स्थित कालीपोयीका रोमांच का एक शानदार स्थान है। वस्तुत: ईको फ्रैण्डली पर्यटन का शानदार हिस्सा कालीपोयीका जल पर्यटन के लिए आदर्श है।

   कोझीकोड बीच की यात्रा के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट कालीकट एयरपोर्ट है। निकटतम रेलवे स्टेशन कोझीकोड रेलवे स्टेशन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी कोझीकोड बीच की यात्रा कर सकते हैं।
11.259100,75.781998

Sunday, 22 December 2019

मांडवी बीच: अद्भुत एवं विलक्षण सौन्दर्य

    मांडवी बीच का प्राकृतिक सौन्दर्य अद्भुत एवं विलक्षण कहा जाना चाहिए। जी हां, इस समुद्र तट की सुन्दरता का कहीं कोई जोड़ नहीं है। शायद इसीलिए इसे धरती का स्वर्ग कहा जाता है। 

   भारत के गुजरात के कच्छ का यह समुद्र तट वैश्विक पर्यटकों का बेहद पसंदीदा पर्यटन है। यहां की सागरतटीय सुन्दरता पर्यटकों को मुग्ध कर लेती है। कच्छ शहर से करीब दो किलोमीटर दूर स्थित मांडवी बीच अपने विशिष्ट आकर्षण से पर्यटकों को खुद ब खुद खींच लेता है। समुद्र तटों के लिए कच्छ खास तौर से प्रसिद्ध है। 

   मांडवी बीच कच्छ का खास समुुद्र तट है। जलक्रीडा का आनन्द लेना हो या तैराकी का मजा लेना हो या फिर सैर सपाटा करना हो... मांडवी बीच बेहद सुन्दर है। कच्छ की संस्कृति भी गुजरात में सबसे अलग है। शायद इसीलिए मान्यता है कि कच्छ के बिना मांडवी की यात्रा अधूरी होगी।

   गुजरात का जिला कच्छ अपनी विशिष्टताओं के लिए वैश्विक ख्याति रखता है। कच्छ का रण शायद इसी लिए प्रकृति का शानदार उपहार माना जाता है। मांडवी बीच घूमने के लिए पर्यटक सामान्यत: कभी भी यात्रा कर सकते हैं लेकिन अक्टूबर से फरवरी की अवधि बेहतर रहती है।

   सुरक्षित स्नान के लिए मांडवी बीच सबसे बेहतरीन माना जाता है। सफेद बालू मांडवी बीच की शान एवं शोभा है। सफेद बालू से सजा मांडवी बीच अपने विशिष्ट सौन्दर्य से पर्यटकों को आकर्षित करता है। मान्यता है कि कच्छ की स्थापना 1581 में की गयी थी। शासक जडेजा ने प्राकृतिक सौन्दर्य से प्रभावित होकर कच्छ की स्थापना की थी। 

   खास यह कि कच्छ को चहारदीवारी से घिरा शहर बनाया गया। मांडवी की सांस्कृतिक एवं आर्थिक समृद्धता भी बेहतरीन है। आर्थिक समृद्धता का सबसे बड़ा कारण यहां का बंदरगाह है। इस बंदरगाह की विशालता का सहज अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि एक समय में 400 से अधिक जहाज इस बंदरगाह पर खड़े हो सकते हैं।

   मांडवी में खास तौर से लकड़ी के जहाज बनाने का उद्योग अति प्रसिद्ध है। मांडवी बीच एवं उसके आसपास आकर्षक एवं लुभावने स्थलों की एक लम्बी श्रंखला विद्यमान है। इनमें खास तौर से विजय विलास पैलेस, जिनालय, रुकमावती पुल आदि इत्यादि हैं।
   विजय विलास पैलेस: विजय विलास पैलेस मांडवी का एक मुख्य आकर्षण है। एक समय यह कच्छ महाराजाओं का राजमहल हुआ करता था। राजघराना इस राजमहल का उपयोग ग्रीष्मकालीन आवास के रूप में करता था। 

   ओरछा एवं दतिया के राजमहलों की स्थापत्य कला पर आधारित स्थापत्य कला इस शानदार महल विजय विलास पैलेस का सौन्दर्य है। राजपूताना शैली पर आधारित विजय विलास पैलेस अति दर्शनीय है। सुन्दर उद्यान आदि इत्यादि इस महल की खूबियां हैं। 
   जिनालय: जिनालय वस्तुत: जैन संप्रदाय का पवित्र तीर्थधाम है। जिनालय अति दर्शनीय एवं सुन्दर है। यहां 72 विशिष्ट स्थान संरचित हैं। इनमें जैन धर्र्म के तीर्थंकर विराजमान हैं।
   रुकमावती पुल: रुकमावती पुल मांडवी का एक अन्य आकर्षण है। इस विशाल पुल की संरचना 1883 में की गयी थी। यह पुल बेहद आकर्षक है।
   जहाज निर्माण उद्योग: जहाज निर्माण उद्योग काफी कुछ खास है। मान्यता है कि जहाज का यह उद्योग 400 वर्ष से भी अधिक प्राचीन है। 
   विंड फार्म बीच: विंड फार्म बीच मांडवी का एक अन्य खास आकर्षण है। सुन्दर एवं शांत सागर तट पर्यटकों को खास तौर से आकर्षित करता है। यहां पवनचक्कियों की एक लम्बी श्रंखला विद्यमान है। यह बेहद आकर्षक प्रतीत होते हैं।

    मांडवी बीच की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट रुद्रमाता भुज में स्थित है। एयरपोर्ट से मांडवी बीच की दूरी करीब 63 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन भुज जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी मांडवी बीच की यात्रा कर सकते हैं।
24.076651,69.539482

बक्खाली : अतुलनीय खूबसूरती    बक्खाली को प्रकृति का अति दर्शनीय शहर कहा जाये तो शायद कोेई अतिश्योक्ति न होगी। जी हां, बक्खाली की खूबसूरत...