अण्डमान एवं निकोबार : धरती का स्वर्ग
अण्डमान एवं निकोबार को अद्भुत पर्यटन कहा जाना चाहिए। जी हां, अण्डमान एवं निकोबार का प्राकृतिक सौन्दर्य विलक्षण है।
शायद यही कारण है कि अण्डमान एवं निकोबार वैश्विक पर्यटकों का बेहद
पसंदीदा है। खास यह कि अण्डमान एवं निकोबार द्वीप समूह एक शानदार हिल
स्टेशन के साथ ही पौराणिक एवं ऐतिहासिक भी है। भारत के केन्द्र शासित इस
प्रदेश में चौतरफा प्रकृति के खूबसूरत नजारे दिखते हैं।
भारत का यह केन्द्र शासित प्रदेश काफी कुछ अलग दर्शनीय है। बंगाल की खाड़ी
के दक्षिण में हिंद महासागर में स्थित अण्डमान एवं निकोबार वस्तुत: एक
शानदार द्वीप समूह है। इसमें छोटे-छोटे 572 द्वीप है। इन सभी द्वीप समूह को
मिला कर अण्डमान एवं निकोबार के नाम से जाना पहचाना जाता है।
खास यह कि इन 572 में कुछ ही द्वीप पर आबादी है। अण्डमान एवं निकोबार की
राजधानी पोर्ट ब्लेयर है। अण्डमान एवं निकोबार पर चौतरफा प्राकृतिक
सौन्दर्य की एक निराली छटा आलोकित है। प्राकृतिक सौन्दर्य की यह
इन्द्रधनुषी छटा वैश्विक पर्यटकों को सम्मोहित करती है।
अण्डमान एवं निकोबार का पौराणिक एवं ऐतिहासिक विशेष महत्व है। भारत के
स्वाधीनता आंदोलन का गवाह अण्डमान एवं निकोबार काफी कुछ विशेष है। समुद्र
तटों एवं हिल स्टेशन की अनोखी शान एवं शोभा रखने वाला अण्डमान एवं निकोबार
को धरती का स्वर्ग भी कहा जा सकता है।
खास यह कि प्राकृतिक सौन्दर्य से लबरेज पर्यटन स्थलों की अण्डमान एवं
निकोबार पर एक लम्बी श्रंृखला विद्यमान है। पर्यटन स्थलों की यह श्रंृखला
किसी जादू या सम्मोहन से कम नहीं है। सेलुुलर जेल, कार्बिन-कोब्स समुद्र
तट, रॉस द्वीप, पिपोघाट फार्म, बेरन द्वीप, डिगलीपुर, बाइपर द्वीप एवं सिंक
एवं रेडस्किन द्वीप यहां के मुख्य आकर्षण हैं।
सेलुलर जेल: सेलुलर जेल अण्डमान एवं निकोबार की एक विशाल पौराणिक एवं
ऐतिहासिक धरोहर है। जिसे कभी भी भुलाया नहीं जा सकता है। वस्तुत: देखें तो
यह विशाल जेल भारत के स्वाधीनता आंदोलनकारियों के उपर हुए अत्याचार की
साक्षी है।
इस विशाल जेल की नींव 1897 में रखी गयी थी। सेलुलर जेल में 694 कोठरियां
है। इन कोठरियों को बनाने का उद्देश्य बंदियों के आपसी मेलजोल को रोकना
था।
आक्टोपॅस की भांति सात शाखाओं में फैली इस पौराणिक जेल के अंश अभी भी
दर्शनीय हैं। कारागार की दीवारों में स्वाधीनता आंदोलन के अमर शहीदों के
नाम दर्ज हैं। खास यह कि इस जेल में एक संग्रहालय भी है। जिसमें स्वाधीनता
आंदोलन में अपनाये गये अस्त्र शस्त्र का प्रदर्शन है।
डिगलीपुर : डिगलीपुर वस्तुत: एक शानदार एवं अति दर्शनीय हिल स्टेशन है।
डिगलीपुर प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है। डिगलीपुर
संतरों के बाग बगीचों, चावल की उपज एवं समुद्री जीवन के लिए खास तौर से
प्रसिद्ध है।
सेडल पीक यहां का मुख्य आकर्षण है। यह पीक अण्डमान एवं निकोबार के सभी
द्वीप समूह में सबसे ऊंचा है। इसकी ऊंचाई 732 मीटर है। अण्डमान की एकमात्र
नदी कलपोंग इसी इलाके में प्रवाहित है। यहां सैर सपाटा का अपना एक अलग
आनन्द है।
कार्बिन कोब्स तट: कार्बिन कोब्स तट वस्तुत: प्राकृतिक सौन्दर्य की गोद
में रचा बसा एक समुद्र तट है। हरे भरे वृक्षों से आच्छादित यह इलाका बेहद
दर्शनीय एवं मनोरम है। समुद्र तट पर स्नान करना बेेहद रोमांचक एहसास कराता
है। पर्यटक यहां प्रकृति की खूबसूरती का निकटता से एहसास कर सकते हैं।
सूर्योदय एवं सूर्यास्त का लालित्य एवं सौन्दर्य यहां मुग्ध कर लेता है।
रॉस द्वीप: रॉस द्वीप को हालांकि अब नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के नाम से
जाना पहचाना जाता है। यह द्वीप खास तौर से ब्रिटिश वास्तुशिल्प के खण्डहरों
के लिए प्रसिद्ध है। करीब 200 एकड़ में फैले रॉस द्वीप को पक्षियों के
आशियाना के तौर पर जाना पहचाना जाता है। पक्षियों का कलरव-कोलाहल पर्यटकों
को मुग्ध कर लेता है।
पिपोघाट फार्म: पिपोघाट फार्म दुर्लभ प्रजातियों की आैषधीय वनस्पतियों, पेड़-पौधों एवं जीव जन्तुओं के लिए खास तौर से जाना पहचाना जाता है। करीब 80 एकड़ में फैला पिपोघाट फार्म प्राचीन लकड़ियों के लिए विशेष ख्याति रखता है।
पिपोघाट फार्म: पिपोघाट फार्म दुर्लभ प्रजातियों की आैषधीय वनस्पतियों, पेड़-पौधों एवं जीव जन्तुओं के लिए खास तौर से जाना पहचाना जाता है। करीब 80 एकड़ में फैला पिपोघाट फार्म प्राचीन लकड़ियों के लिए विशेष ख्याति रखता है।
बेरन द्वीप: बेरन द्वीप वस्तुत: एक ज्वालामुखी क्षेत्र है। विशेषज्ञों की
मानें तो बेरन द्वीप भारत का इकलौता सक्रिय ज्वालामुखी है। यह द्वीप करीब 3
वर्ग किलोमीटर में फैला है। विशेषज्ञों की मानें तो वर्ष 2005 में
ज्वालामुखी फटा था। इसके बाद से ज्वालामुखी से अब तक निरन्तर लावा निकल रहा
है।
बाइपर द्वीप: बाइपर द्वीप भारत के स्वाधीनता आंदोलन को याद कराता है। यह पौराणिक एवं ऐतिहासिक स्थान है। बंदियों को पोर्ट ब्लेयर के पास बाइपर द्वीप पर उतारा जाता था। हालांकि अब यह द्वीप एक शानदार पिकनिक स्पॉट के तौर पर विकसित हो चुका है। स्वाधीनता आंदोलन की कई घटनाएं भी बाइपर द्वीप पर हुई।
सिंक एवं रेडस्किल द्वीप: सिंक एवं रेडस्किल द्वीप पर्यटकों का मन मोह लेता है।
बाइपर द्वीप: बाइपर द्वीप भारत के स्वाधीनता आंदोलन को याद कराता है। यह पौराणिक एवं ऐतिहासिक स्थान है। बंदियों को पोर्ट ब्लेयर के पास बाइपर द्वीप पर उतारा जाता था। हालांकि अब यह द्वीप एक शानदार पिकनिक स्पॉट के तौर पर विकसित हो चुका है। स्वाधीनता आंदोलन की कई घटनाएं भी बाइपर द्वीप पर हुई।
सिंक एवं रेडस्किल द्वीप: सिंक एवं रेडस्किल द्वीप पर्यटकों का मन मोह लेता है।
चौतरफा जलीय क्षेत्र होने के कारण द्वीप अति दर्शनीय प्रतीत होता है। यहां
का स्वच्छ एवं निर्मल जल सौन्दर्य पर्यटकों का मनमोह लेता है। यहां जल में
तैरती डाल्फिन मछलियां विशेष आकर्षित करती हैं। पानी के नीचे जलीय पौधे
एवं रंगीन मछलियां देख कर पर्यटक रोमांच से भर उठते हैं।
अण्डमान एवं निकोबार द्वीप समूह की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध
हैं। अण्डमान एवं निकोबार की राजधानी पोर्ट ब्लेयर में एयरपोेर्ट है। पोर्ट
ब्लेयर एयरपोर्ट से इण्टरनेशनल उड़ानें मिलती हैं। पर्यटक कोलकाता, चेन्नई
एवं विशाखापट्टनम से जलयान से पोर्ट ब्लेयर पहंुच सकते हैं।
10.222670,93.243011
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