Tuesday, 14 January 2020

पांडिचेरी बीच: अतुलनीय प्राकृतिक सौन्दर्य

    पांडिचेरी बीच का प्राकृतिक सौन्दर्य अतुुलनीय कहा जाना चाहिए। जी हां, पांडिचेरी बीच का प्राकृतिक सौन्दर्य अद्भुत एवं विलक्षण है। 

    खास यह कि इसे प्रोमेनेड बीच के नाम से भी जाना एवं पहचाना जाता है। भारत के केन्द्र शासित पांडिचेरी का प्राकृतिक सौन्दर्य पर्यटकों के दिलों में छा जाता है। शायद इसीलिए पांडिचेरी वैश्विक पर्यटकों का बेहद पसंदीदा पर्यटन है। इस समुद्र तट को पांडिचेरी का मुख्य आकर्षण भी कह सकते हैं। 

   इस अति खूबसूरत बीच के अवशेष के रूप में रिपरैप शिलाखण्ड की समुद्री दीवार भी एक आकर्षण है। इस दीवार पर बना समुद्र तट भी अति दर्शनीय है। इसे ला फोक्स प्लेज कहा जाता है। इसका शाब्दिक अर्थ होता है 'नकली बीच"। पर्यटक ला फोक्स प्लेज पर दिन में मौज मस्ती कर सकते हैं। 

   समुद्र किनारे टहलने के लिए यह एक आदर्श स्थान है। करीब 1.5 किलोमीटर एरिया में फैला प्रोमेनेड बीच बेहद दर्शनीय होने के साथ ही पांडिचेरी का मुख्य आकर्षण भी है। 
   हालांकि पांडिचेरी में समुद्र तटों की एक लम्बी श्रंखला विद्यमान है। इन बेहतरीन समुद्र तटों में पैराडाइज तट, सेरेनिटी तट एवं आरोविले समुद्र तट आदि इत्यादि हैं। यहां की सुनहरी एवं चमकदार रेत के बीच अठखेलियां करना पर्यटकों को बेहद भाता है। 

   नारियल के शानदार वृक्षों की श्रंखला समुद्र तटों को आैर भी अधिक सुन्दर बना देती है। यंू कहें कि पांडिचेरी के समुद्र तट पर्यटकों के आनन्द को दोगुना कर देते हैं तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। अद्वितीय वास्तुकला के इस शहर के समुद्र तट पांडिचेरी की शोभा एवं शान हैं।

  अनूठी वास्तुकला से अति समृद्ध पांडिचेरी स्वादिष्ट भोजन-व्यंजन के लिए भी खास तौर से जाना एवं पहचाना जाता है। समुद्री भोज्य पदार्थों के साथ ही नारियल से बने भोज्य पदार्थ बेहद स्वादिष्ट एवं लजीज होते हैं। इस स्वाद को पर्यटक कभी भूल नहीं पाते। 

    हालांकि पांडिचेरी की भोजन संस्कृति पर तमिल प्रभाव दिखता है। भोजन एवं पाक कला के लिए खास तौर से भोज्य पदार्थों के लिए जाना एवं पहचाना जाने वाला पांडिचेरी अपनी भोज्य पदार्थ कला कौशल में नारियल उत्पाद के व्यंजनों की एक लम्बी श्रंखला रखता है। 

   वस्तुत: देखें तो पांडिचेरी अपने आगोश में खूबसूरती की विविधिता रखता है। खूबसूरती की यह विविधिता ही पर्यटकों को आकर्षित करती है। वैसे देखें तो पांडिचेरी के खास आकर्षण में बोटेनिकल गार्डेन, फ्रांस युद्ध स्मारक, अरबिंदो आश्रम, ओरोविले, सैक्रेड हार्ट चर्च आफ जीसस एवं पांडिचेरी संग्रहालय आदि इत्यादि हैं।
    बोटेनिकल गार्डेन: बोटेनिकल गार्डेन एवं एक्वैरियम पांडिचेरी की शान एवं शोभा हैं। वस्तुत: बोटेनिकल गार्डेन विदेशी पौधों का एक विशाल संग्रह क्षेत्र है। जीव विज्ञान के छात्रों एवं शोधार्थियों के लिए यह बेहद उपयोगी है। यह अद्भुत एवं विलक्षण गार्डेन बस स्टैण्ड के दक्षिणी द्वार के निकट स्थित है।

  करीब 22 एकड़ क्षेत्र में फैला बोटेनिकल गार्डेन पांडिचेरी का एक मुख्य आकर्षण है। एक्वैरियम में समुद्री जीवों की विविधिता दर्शनीय है। इसे पांडिचेरी का एक खास पर्यटन कहा जा सकता है।
  खास यह कि जलीय जीवन की यह एक अनोखी झलक है। बच्चों की ट्रेन, डांसिंग फव्वारा एवं कुछ दुर्लभ फव्वारा यहां की शान एवं शोभा हैं। 
   फ्रांस युद्ध स्मारक: फ्रांस युद्ध स्मारक प्रथम युद्ध में शहीद हुए युद्ध नायकों की स्मृति में बनवाया गया स्मारक है। वर्ष 1971 में बनवाया गया स्मारक बैस्टिल दिवस पर विशेष तौर से सजाया जाता है। इस दिवस को फ्रैंच शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है।    
   अरबिंदो आश्रम: अरबिंदो आश्रम की स्थापना 1926 में की गयी थी। अरबिंद घोष ने आश्रम की स्थापना की थी। आश्रम में एक विस्तृत पुस्तकालय भी है।

   ओरोविले: ओरोविले पांडिचेरी से कुछ दूर स्थित है। वस्तुत: इसे प्रात: काल का शहर कहा जाता है। यह एक ऐसा शहर है, जहां विभिन्न संस्कृतियां दर्शित हैं। 
   विशेषज्ञों की मानें तो ओरोविले में दुनिया के पचास से अधिक देशों के बाशिंदों के घर हैं। इसे व्यापक तौर पर एक वैश्विक शहर माना जाता है। ओरोविले सांस्कृतिक सद्भाव के लिए खास तौर से जाना एवं पहचाना जाता है। इस शहर का मुख्य आकर्षण मातृ मंदिर है। इसकी भव्यता दिव्यता पर्यटकों को आकर्षित करती है। 
   पांडिचेरी संग्रहालय: पांडिचेरी संग्रहालय में पांडिचेरी को देखा जा सकता है। इस संग्रहालय को शहर का मील का पत्थर भी कहा जा सकता है। इस संग्रहालय में असंख्य मूर्तियां, अरिकामेडु रोमन काल की असंख्य महत्वपूर्ण एवं पुरातात्विक वस्तुएं हैं। 
   खास यह है कि प्राचीनकाल की दुर्लभ कलाकृतियों का यह भण्डार है। खास यह कि सीपियों का यहां अद्भुत संग्रह है। भारती पार्क में स्थित पांडिचेरी संग्रहालय काफी कुछ अनोखा है।
    पांडिचेरी की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट चेन्नई एयरपोर्ट है। चेन्नई एयरपोर्ट से पांडिचेरी की दूरी करीब 135 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन मदुरै रेेलवे जंक्शन एवं चेन्नई रेलवे जंक्शन हैं। पर्यटक सड़़क मार्ग से भी पांडिचेरी की यात्रा कर सकते हैं।
11.941591,79.808311

Sunday, 5 January 2020

मुनरो द्वीप: इन्द्रधनुषी पर्यटन

    मुनरो द्वीप को इन्द्रधनुषी पर्यटन कहा जाना चाहिए। जी हां, मुनरो द्वीप का प्राकृतिक सौन्दर्य अद्भुत एवं विलक्षण है। वस्तुत: मुनरो द्वीप आठ छोटे द्वीपों का एक समूह अर्थात बड़ा द्वीप है। 

    भारत के केरल प्रांत के कोल्लम जिला का यह द्वीप अति दर्शनीय है। स्थानीयता में इसे मुनरो थुरूप भी कहा जाता है। छोटे-छोटे आठ द्वीपों का यह समूह जल पर्यटन के लिए खास तौर से जाना एवं पहचाना जाता है।

   खास यह है कि कोल्लम से करीब 27 किलोमीटर दूर स्थित मुनरो द्वीप की यात्रा जल परिवहन एवं सड़क परिवहन दोनो से ही की जा सकती है। वस्तुत: मुनरो द्वीप अष्टमुड़ी झील एवं कल्लड़ा नदी का संगम स्थल है। विशेषज्ञों की मानें तो इस अति दर्शनीय द्वीप की खोज एक ब्रिटिश अफसर ने की थी। 

   ब्रिटिश अफसर का नाम कर्नल जॉन मुनरो था। लिहाजा इस शानदार द्वीप को कर्नल मुनरो के नाम से जाना एवं पहचाना गया। कर्नल मुनरो ने इस क्षेेत्र में नहरों एवं अन्य संरचनाओंं का आकार प्रकार दिया था। 

   खास यह रहा कि ब्रिटिश अफसर मुनरो ने इलाके में बैकवाटर्स के मार्गों के एकीकरण में विशेष भूमिका का निर्वाह किया था। लिहाजा मुनरो द्वीप ने एक शानदार जल पर्यटन का स्वरूप अख्तियार किया। मुनरो द्वीप का प्राकृतिक सौन्दर्य देश विदेश के पर्यटकों को रोमांचित करता है। लिहाजा पर्यटन यहां के सौन्दर्य से खिचें चले आते हैं। 

   सैलानी मुनरो द्वीप का प्राकृतिक सौन्दर्य निहारने एक बार अवश्य आते हैं। मुनरो द्वीप की यात्रा के बाद पर्यटक यहां के रोमांच को जीवन पर्यंत भूल नहीं पाते हैं। खास यह कि इस सुन्दर द्वीप का धार्मिक महत्व भी है।

  इस द्वीप पर मुलाछत्रा एवं कल्लुविला अति दर्शनीय मंदिर हैं। एक प्राचीन चर्च भी इस द्वीप की शान एवं शोभा है। इस चर्च की संरचना 1878 में की गयी थी। 
   मुनरो द्वीप का एक विशेष स्थान पल्लीयाम थुरूथ अपनी सुन्दरता एवं शांति के लिए जाना एवं पहचाना जाता है। इसेे छुट्टियां मनाने के लिए एक आदर्श स्थान माना जाता है। नहरों एवं झीलों का यह संगम बेेहद सुन्दर है। 

    ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे पर्यटक स्वप्नलोक में विचरण कर रहे हों। मुनरो द्वीप पर दर्शनीय स्थलों की एक लम्बी श्रंखला विद्यमान है। चौतरफा नारियल के सुन्दर पेड़ों की श्रंखला मुनरो द्वीप की सुन्दरता में चार चांद लगा देती है। 

   खास यह कि नारियल के रेशों केे उद्योग के लिए मुनरो द्वीप खास तौर से प्रसिद्ध है। बैकवाटर्स की दृष्टि से देखें तो मुनरो द्वीप एक छिपा हुआ मोती है। खास तौर से ओणम पर नाव की दौड़ देखने वाली होती है। ऐसा प्रतीत होता है कि जल पर्यटन का शानदार श्रंगार किया गया हो। 

   ओणम पर मुनरो द्वीप किसी दुल्हन की भांति दिखता है। मुनरो द्वीप पर्यटन की अनूठी परिभाषा को रेखांकित करता है। द्वीप की शांत शीतलता पर्यटकों को प्रफुल्लित कर देेती है। 

    पर्यटक इस द्वीप पर नौकायन का भी भरपूर आनन्द ले सकते हैं। चाहे क्रूज की सवारी करनी हो या फिर नौका में द्वीप का भ्रमण करना हो या फिर जलक्रीड़ा का आनन्द लेना हो।

  मुनरो द्वीप आनन्द की हर सुखद अनुभूति प्रदान करता है। मुनरो द्वीप पर ठहरने के लिए आलीशान रिसार्ट एवं अतिथिगृह है। लिहाजा पर्यटक मुनरो द्वीप के रोमांच का भरपूर आनन्द ले सकते हैं।

   मुनरो द्वीप की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट तिरुवनंतपुरम इण्टरनेशनल एयरपोर्ट है। एयरपोर्ट से मुनरो द्वीप की दूरी करीब 84 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन कोल्लम रेलवे जंक्शन है। कोल्लम रेलवे स्टेशन से मुनरो द्वीप की दूरी करीब 27 किलोमीटर है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी मुनरो द्वीप की यात्रा कर सकते हैं।
8.973700,76.609220

बक्खाली : अतुलनीय खूबसूरती    बक्खाली को प्रकृति का अति दर्शनीय शहर कहा जाये तो शायद कोेई अतिश्योक्ति न होगी। जी हां, बक्खाली की खूबसूरत...