Monday, 25 November 2019

कोट्टापुरम बैकवाटर्स: आनन्द की सुखद अनुभूति

   कोट्टापुरम बैकवाटर्स...। जल पर्यटन के शौकीन हैं तो केरल के बैकवाटर्स की यात्रा अवश्य करनी चाहिए। जी हां, भारत के दक्षिणी प्रांत केरल का बैकवाटर्स टूरिज्म बेहद रोमांचक है। 

    अरब सागर के सामानांतर झीलों एवं नहरों की एक शानदार एवं लम्बी श्रंखला विद्यमान है। करीब 205 किलोमीटर लम्बा यह जलमार्ग भारत का एक शानदार जल पर्यटन क्षेत्र है। कोल्लम से कोट्टापुरम तक फैला यह बैकवाटर्स प्राकृतिक सौन्दर्य का एक अनुपम संगम है। 

   खास यह है कि प्राकृतिक एवं कृतिम नहरों का यह एक वृहद संजाल है। इस शानदार बैकवाटर्स में पांच झीलें शामिल हैं। इतना ही नहीं, करीब 38 नदियों के संगम कोट्टापुरम बैकवाटर्स का जल सौन्दर्य अति दर्शनीय है। 

   विशेषज्ञों की मानें तो केरल के उत्तर-दक्षिण लम्बाई का 50 प्रतिशत हिस्सा कोट्टापुरम बैकवाटर्स से आच्छादित है। कोल्लम से कोट्टापुरम तक फैले इस बैकवाटर्स का इन्द्रधनुषी रंग देखते ही बनता है। लिहाजा पर्यटक कोट्टापुरम बैकवाटर्स पर जल पर्यटन का भरपूर आनन्द ले सकते हैं। 

   विशेषज्ञों की मानें तो अनूप झीलों, नहरों, नदियों एवं समुद्री क्षेत्र का यह इलाका 900 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ है। इस जल क्षेत्र में कई गांव एवं छोटे नगर बसे हुए हैं। जिससे पर्यटक विलेज टूरिज्म का भी आनन्द ले सकते हैं। कोट्टापुरम बैकवाटर्स क्षेत्र में पर्यटक प्रवास कर वॉटर टूरिज्म का रोमांचक अनुभव कर सकते हैं। 

   पर्यटन के साथ साथ यह इलाका माल वाहक क्षेत्र के तौर पर भी प्रसिद्ध है। कोट्टापुरम बैकवाटर्स इलाके की लाइफ लाइन भी है। पर्यटन कोट्टापुरम बैकवाटर्स का मुख्य व्यवसाय है। 
  खास यह है कि कोट्टापुरम बैकवाटर्स का मुख्य आकर्षण अष्टमुड़ी झील है। कोल्लम के निकट स्थित अष्टमुड़ी झील का अप्रतिम सौन्दर्य पर्यटकों को खुद ब खुद आकर्षित करती है। 

   वस्तुत: अष्टमुड़ी झील कोल्लम के पास स्थित नहरों का एक विस्तृत संजाल है। केरल को नदियों, झीलों एवं जलमार्ग का अद्भुत एवं विलक्षण संगम कहा जाना चाहिए। केरल के उत्तर-दक्षिण में देखें तो नदियों की एक लम्बी श्रंखला विद्यमान है।

   इन नदियों में खास तौर से देखें तो 110 किलोमीटर लम्बी वालपट्टनम नदी, 69 किलोमीटर लम्बी चलियार नदी, 209 किलोमीटर लम्बी कदलुंदिपुड़ा नदी, 130 किलोमीटर लम्बी चालकुड़ी नदी, 244 किलोमीटर लम्बी पेरियार नदी, 176 किलोमीटर लम्बी पम्बा नदी, 128 किलोमीटर लम्बी अचनकोइल नदी, 121 किलोमीटर लम्बी कल्लदायार नदी आदि इत्यादि की एक लम्बी श्रंखला विद्यमान है। इनके अलावा 35 से अधिक छोटी नदियों का संजाल है। 

   नदियों का यह परिस्थितिक तंत्र कोट्टापुरम बैकवाटर्स की शान एवं शोभा है। केरल का यह बैकवाटर्स दुनिया का अद्भुुत एवं विलक्षण जल पर्यटन है। दुनिया के इस लोकप्रिय पर्यटन की ओर पर्यटक स्वत: खिचें चले आते हैं। कोट्टापुरम बैकवाटर्स के आंतरिक एवं बाह्य क्षेत्र में स्थित आलीशान रिसोर्ट एवं अतिथि गृह पर्यटकों का भरपूर स्वागत करतेे हैं। 

   पर्यटक नौकायन, जलक्रीडा का आनन्द लेने के साथ ही क्रूज एवं स्टीमर आदि की सवारी कर वाटर टूरिज्म का आनन्द ले सकते हैं। बैकवाटर्स का प्रशांत नौका विहार पर्यटकों को कभी न भूूलने वाला आनन्द एवं अनुभव प्रदान करता है। अलप्पुझा बैकवाटर्स को पूर्व वेनिस कहा जाता है। यह इलाका खास तौर से हाउसबोट नौका विहार के लिए प्रसिद्ध है। 

   खास यह कि पर्यटक यहां प्रकृति के मनोरम सौन्दर्य में खो जाते हैं। पर्यटक कोट्टापुरम बैकवाटर्स पर केरल के सांस्कृतिक परिवेश के भी दर्शन कर सकते हैं। कला एवं संस्कृति की सदियों पुरानी परम्पराएं अति दर्शनीय होती हैं। 

   लोक कलाओं, अनुष्ठान कलाओं, स्थापत्य कला, शिल्प कला का सौन्दर्य देख कर पर्यटक मुग्ध हो उठते हैं। कला एवं संस्कार की जीवंतता कोट्टापुरम बैकवाटर्स पर खास तौर से दर्शनीय हैं। गांव की सोंधी सुगंध पर्यटकों को लुभाती है।

   कोट्टापुरम बैकवाटर्स की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट तिरुवंतपुरम एयरपोर्ट है। एयरपोर्ट से कोेट्टापुरम की यात्रा कर पर्यटक कोट्टापुरम बैकवाटर्स की यात्रा प्रारम्भ कर सकते हैं। 
  निकटतम रेलवे स्टेशन तिरुवंतपुरम जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी कोट्टापुरम बैकवाटर्स की यात्रा कर सकते हैं।
10.529220,76.205410

Sunday, 24 November 2019

बेम्बनाड बैकवाटर्स : रोमांचक जल पर्यटन

    बेम्बनाड बैकवाटर्स को जल पर्यटन का अद्भुत एवं विलक्षण आयाम कहा जाना चाहिए। जी हां, नहरों एवं नदियों का यह सुन्दर संगम अति दर्शनीय एवं रोमांचक है। 

   भारत के केरल का यह शानदार जल पर्यटन क्षेत्र अति शानदार है। पर्यटक बेम्बनाड बैकवाटर्स पर जल पर्यटन का भरपूर आनन्द ले सकते हैं। 

   बेम्बनाड बैकवाटर्स को भारत का एक आदर्श एवं इन्द्रधनुषी पिकनिक स्पॉट भी कहा जा सकता है। वस्तुत: केरल का यह विशाल बैकवाटर्स तीन जिलों तक फैला हुआ है। अलापुझा, एर्नाकुलम एवं कोट्टायम तक फैला बेम्बनाड बैकवाटर्स की यात्रा पर्यटकों को एक शानदार रोमांच से भर देती है। 

   प्राकृतिक सौन्दर्य का यह अद्भुत संगम वैश्विक पर्यटकों का भी पसंदीदा पर्यटन है। लिहाजा बेम्बनाड बैकवाटर्स का रोमांचक आनन्द लेने के लिए वैश्विक पर्यटकों का आना निरन्तर जारी रहता है।

   पर्यटक बेम्बनाड बैकवाटर्स पर बोटिंग, फिशिंग एवं साइटसीकिंग का भी भरपूर आनन्द ले सकते हैं। करीब 96 किलोमीटर की लम्बाई वाले बेम्बनाड बैकवाटर्स इलाके में कई गांव भी हैं। इन गांव में पर्यटक विलेज टूरिज्म का भरपूर आनन्द ले सकते हैं।


    बेम्बनाड बैकवाटर्स की चौड़ाई करीब 14 किलोमीटर है। खास यह कि इस बेम्बनाड बैकवाटर्स को कुट्टनाड़ एवं पुन्नमड़ झील के नाम से भी जाना एवं पहचाना जाता है। 

    इसका इन्द्रधनुषी प्राकृतिक सौन्दर्य भारत के जल पर्यटन को वैश्विक पर्यटन क्षेत्र मेें विशिष्ट रंग ढं़ग से दर्शाता है। शायद इसीलिए भारत सरकार ने बेम्बनाड बैकवाटर्स क्षेत्र को राष्ट्रीय जल भूमि संरक्षण योजना में शामिल किया है।

   करीब 2033 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैले इस शानदार बैकवाटर्स को वस्तुत: एक शानदार जलद्वीप कहा जा सकता है।

   बैकवाटर्स का सबसे प्रसिद्ध बैकवाटर्स कुमारकोम भी बेम्बनाड बैकवाटर्स इलाके में स्थित है। बेम्बनाड बैकवाटर्स वस्तुत: अलापुझा, एर्नाकुलम एवं कोट्टायम जिलों की लाइफ लाइन भी है। 

  खास यह है कि बेम्बनाड बैकवाटर्स के एक इलाके का जल मीठा है तो एक इलाके का जल खारा अर्थात नमकीन है।

  जलीय जीवन की प्रचुरता बेम्बनाड बैकवाटर्स एवं आसपास की आबादी की जीविका का एक बड़ा साधन है। नदमुख एवं लैगून आदि नहरों का एक शानदार नेटवर्क बेम्बनाड बैकवाटर्स को आदर्श बनाता है।

   बेम्बनाड बैकवाटर्स की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट कोच्चि एयरपोर्ट है। कोच्चि एयरपोर्ट से बेम्बनाड बैकवाटर्स कोट्टायम की दूरी करीब 51 किलोमीटर है।

   पर्यटक तिरुवनन्तपुरम इण्टरनेशनल एयरपोर्ट से भी बेम्बनाड बैकवाटर्स कोट्टायम की यात्रा की जा सकती है। निकटतम रेलवे स्टेशन तिरुवनन्तपुरम जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी बेम्बनाड बैकवाटर्स की यात्रा कर सकते हैं।
9.591750,76.531914

Wednesday, 20 November 2019

माजुली द्वीप : अद्भुत जल पर्यटन

   जल पर्यटन के शौकीन हैं तो माजुली द्वीप की यात्रा अवश्य करनी चाहिए। माजुली द्वीप भारतीय जल पर्यटन का एक शानदार एवं सुन्दर आयाम है। 

  माजुली द्वीप पर जल की निर्मलता एवं अविरल प्रवाह पर्यटकों को मुग्ध कर लेता है। भारत के असम के जिला माजुली का यह शानदार द्वीप अपनी एक अलग एवं अनोखी आभा रखता है। माजुली द्वीप की विशिष्टताओं से प्रभावित होकर यूनेस्को ने माजुली द्वीप को विश्व धरोहर श्रंखला में शामिल किया है। 

   विशेषज्ञों की मानें तो माजुली द्वीप को वस्तुत: सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक धरोहर कहा जाना चाहिए। माजुली द्वीप सिर्फ एक नदी क्षेत्र ही नहीं है, बल्कि विश्व का सबसे बड़ा द्वीप भी है। 
   खास यह कि माजुली द्वीप को असम का वैष्णव धर्म केन्द्र भी माना जाता है। माजुली द्वीप बेहद जीवंत है। जिससे माजुली द्वीप वैश्विक पर्यटकों कोे आकर्षित करता है।

   खास यह कि ब्राह्मपुत्र नदी माजुली द्वीप की शान एवं शोभा है। करीब 421.65 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैले इस सुन्दर द्वीप को काफी कुछ विशिष्ट माना जाता है। 
   जोरहाट से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित माजुली द्वीप की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। लिहाजा इस जल पर्यटन की यात्रा काफी आसान हो जाती है।

   खास यह कि माजुली द्वीप का जीवन उमंगों एवं संस्कृति से भरा हुआ है। जिससे माजुली द्वीप में अद्भुत जीवंतता दिखती है। माजुली द्वीप को धर्म एवं संस्कृति का पर्याय कहें तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। खास यह कि मठ एवं धरोहर इस द्वीप को दर्शनीय एवं संस्कृतिवान बना देते हैं। 

   माजुली द्वीप को शास्त्रीय नृत्य सतरिया का केन्द्र एवं गढ़ माना जाता है। मान्यता है कि असमिया संत शंकरदेव ने इस क्षेत्र में वैष्णव धर्म का प्रचार-प्रसार किया। इसके बाद उनके शिष्य माधवदेव ने इसका प्रचार-प्रसार किया। 

   माजुली को असम की सांस्कृतिक राजधानी भी कहा जाता है। संस्कृति एवं धर्म का प्रचार-प्रसार सतरों के माध्यम से किया जाता है। मान्यता है कि सतरों को देखे बिना माजुली द्वीप की यात्रा अधूरी मानी जायेगी। 
   माजुली द्वीप की व्यवस्थाएं खास तौर से दो दर्जन से अधिक सतरों के सानिध्य में संचालित होती हैं। इनकी अपनी एक अलग परम्पराएं एवं असमिया संस्कृति है।

   हालांकि असमिया संस्कृति की वैश्विक पटल पर अपनी एक खास साख एवं पहचान है। कमलाबाड़ी सतरा माजुली द्वीप का सबसे बड़ा एवं प्रभावशाली सतरा है।
   वहीं, आैनियाती सतरा पालनाम एवं अप्सरा नृत्य के लिए खास तौर से प्रसिद्ध है। बेंगानाती एवं शामागुरी सतरा भी माजुली द्वीप के खास सतरा हैं। 


   माजुली द्वीप मुख्य रूप से जनजातीय क्षेत्र है। इस द्वीप में गांव भी हैं। इतना ही नहीं, जलीय क्षेत्र में इनका अपना एक अलग रहन-सहन दिखता है। लकड़ी के खम्भों का मचान बना कर उसे आवास का स्वरूप दिया जाता है। 
   पर्यटक माजुली द्वीप के गांव में भुगतान आधारित अतिथि के तौर पर ठहर सकते हैं। आशय यह कि पर्यटक यहां विलेज टूरिज्म का भरपूर आनन्द ले सकते हैं। बसंत ऋतु माजुली द्वीप का मुख्य आकर्षण होता है। 

   माजुली द्वीप का हस्तशिल्प भी बेजोड़ है। इनमें खास तौर से मुखौटा, मिट्टी के बर्तन, मूंगा, रेशम आदि इत्यादि हैं। हस्तशिल्प एवं हथकरघा माजुली द्वीप का एक अन्य आकर्षण है। प्राकृतिक सुन्दरता के साथ ही जैव विविधिता माजुली द्वीप की विशिष्टता है। 

   माजुली द्वीप की जैव विविधिता की दर्शनीयता के लिए वैश्विक पर्यटक अति उत्साह के साथ माजुली द्वीप की यात्रा करते हैं। प्रवासी दुर्लभ पक्षियों के लिए माजुली द्वीप स्वर्ग है। दुर्लभ एवं लुप्तप्राय पक्षियों का आवागमन माजुली द्वीप पर अनवरत जारी रहता है। 

    इनमें हवासील, साइबेरियन क्रेन, ग्रेटर एडजुटेंट सारस आदि इत्यादि हैं। माजुली द्वीप की यात्रा का सबसे बेहतरीन समय नवम्बर से मार्च की अवधि होता है। जोरहाट से करीब 20 किलोेमीटर की दूरी पर स्थित माजुली द्वीप पर पर्यटक आैषधीय वनस्पतियों की सुगंध का भी एहसास करते हैं।

    माजुली द्वीप की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध है। निकटतम एयरपोर्ट जोरहाट एयरपोर्ट है। निकटतम रेलवे स्टेशन भी जोरहाट जंक्शन है। जोरहाट से माजुली द्वीप की दूरी करीब 20 किलोमीटर है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी जोरहाट की यात्रा कर माजुली द्वीप पहंुच सकते हैं।
26.836960,93.767880

Wednesday, 13 November 2019

गोपालपुर : समुद्र तटीय शहर का आनन्द

   समुद्री तट का रोमांचक आनन्द लेना हो तो गोपालपुर की यात्रा अवश्य करें। जी हां, गोपालपुर समुद्री सौन्दर्य का खजाना कहें तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। 

   भारत के उड़ीसा के दक्षिणी इलाके का गोपालपुर वस्तुत: समुद्र तटीय शहर है। बंगाल की खाड़ी से ताल्लुक रखने वाला गोपालपुर अपने खास प्राकृतिक सौन्दर्य के लिए वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध है। खास यह कि उड़ीसा के तीन प्रमुख पर्यटन स्थलों में गोपालपुर पर्यटकों को खास तौर से पसंद है। 

  बहरामपुर से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित गोपालपुर वस्तुत: बैकवाटर्स का भरपूर आनन्द प्रदान करता है। उड़ीसा का बंदरगाह पर्यटन का मुख्य आकर्षण है। मछली का शिकार करने के लिए खास तौर से प्रसिद्ध गोपालपुर ने शनै:-शनै: एक अति दर्शनीय पर्यटन का स्वरूप धारण कर लिया।

   ब्रिटिश हुकूमत ने एक छोटे से गांव से गोपालपुर के भाग्य को ही बदल दिया। आंध्र प्रदेश के निकट स्थित उड़ीसा के इस शहर को खास तौर से पर्यटन के लिए जाना एवं पहचाना जाता है। विशाल समुद्र तट गोपालपुर के मुख्य आकर्षण हैं।


   गोपालपुर को धर्म, आध्यात्म, पौराणिकता एवं ऐतिहासिक महत्व के साथ ही समुद्र तट के प्राकृतिक सौन्दर्य के लिए दुनिया में खास मुकाम हासिल है। गोपालपुर में असंख्य धार्मिक स्थान हैं तो वहीं जीवन शैली में एक अलग ही संस्कृति के दर्शन होते हैं। 


  गोपालपुर के मुख्य आकर्षण में माता तारा तारिणी हिल श्राइन, बाला कुमारी मंदिर, श्री सिद्ध विनायक पीठ आदि इत्यादि शामिल हैं। गोपालपुर के आकर्षक समुद्र तट में सोनेपुर तट, आर्यापल्ली तट एवं गोपालपुर तट आदि इत्यादि हैं। 

   गोपालपुर यात्रा के दौरान पर्यटक विलेज टूरिज्म का भी आनन्द ले सकते हैं। गोपालपुर के आकर्षक गांव पंचामा एवं बालीपादर आदि इत्यादि गांव हैं। हालांकि यह गांव गोपालपुर के पड़ोसी गांव हैं लेकिन पर्यटक इन गांव की यात्रा कर विलेज टूरिज्म का भरपूर आनन्द ले सकते हैं।

   सातापाड़ा वन्य जीव अभयारण्य एवं बानकेश्वरी आदि इत्यादि भी गोपालपुर के मुख्य आकर्षण हैं। शापिंंग के शौकीन पर्यटक गोपालपुर में भरपूर आनन्द ले सकते हैं। समुद्री सीपियों से सृजित हस्तशिल्प कलाकृतियां गोपालपुर की विशेषता है। गोपालपुर की सिल्क की साड़ियां भी विशेष होती हैं। 


   गोपालपुर का समुद्री सीपियों से बना हस्तशिल्प अति सुन्दर एवं दर्शनीय होता है। लिहाजा पर्यटक गोपालपुर में शापिंग का शौक पूरा कर सकते हैं। हालांकि गोपालपुर का मौसम सदैव बेहतरीन रहता है। फिर भी गोपालपुर की यात्रा अक्टूबर से अप्रैल की अवधि में करनी चाहिए। इस अवधि में प्रकृति का सुन्दर परिदृश्य मुग्ध कर लेगा। 

   खास यह कि गोपालपुर में प्राकृतिक सौन्दर्य का हर रंग विद्यमान है। लिहाजा पर्यटक यहां के सौन्दर्य पर मुग्ध हो जाते हैं। पर्यटक समुद्र तट पर सन बाथ का भरपूर आनन्द ले सकते हैं। पर्यटक समुद्र तट पर घुडसवारी का भी आनन्द ले सकते हैं। निश्चय ही गोपालपुर के समुद्र तट पर्यटकों को एक नई ऊर्जा से भर देंगे। 
   ताप्तापानी वॉटर फॉल्स: ताप्तापानी वॉटर फॉल्स गोपालपुर पर्यटन का मुख्य आकर्षण है। इसका शाब्दिक अर्थ है उबलता पानी। बहरामपुर से करीब 50 किलोमीटर दूर स्थित ताप्तापानी एक गर्म पानी का रुाोत है। सल्फर युक्त ताप्तापानी के जल को आैषधीय गुणों से अति समृद्ध माना जाता है। विश्वास है कि इस जल में स्नान करने से त्वचा रोग का निदान हो जाता है। 
   आर्यापल्ली तट: आर्यापल्ली तट गोपालपुर का एक मुख्य आकर्षण है। इस स्थान से सूर्यास्त एवं सूर्योदय का प्राकृतिक सौन्दर्य अति दर्शनीय होता है। बेहद निराली छटा मुग्ध कर लेती है। आर्यापल्ली तट का आकर्षण पर्यटकों को शांत एवं शीतल सुकून प्रदान करता है।
   माता तारा तारिणी हिल श्राइन: माता तारा तारिणी हिल श्राइन उड़ीसा का मुख्य धार्मिक स्थान है। माता तारा का यह सबसे प्राचीन मंदिर माना जाता है। कुमारी हिल्स पर स्थित यह दिव्य-भव्य मंदिर ऋषिकुल्या नदी के तट पर विद्यमान है। यह स्थान गोपालपुर से कुछ ही दूरी पर स्थित है।
   बहरामपुर से तारा देवी मंदिर की दूरी करीब 13 किलोमीटर है। वस्तुत: यह मंदिर दो देवियों को समर्पित है। गर्भगृह में माता तारा एवं माता तारिणी की प्रतिमाएं प्राण प्रतिष्ठापित हैं। देवियों को आदिशक्ति का स्वरूप माना जाता है।
   गोपालपुर की यात्रा के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट बीजू पटनायक इण्टरनेशनल एयरपोर्ट भुवनेश्वर है। निकटतम रेलवे स्टेशन बहरामपुर जंक्शन है। बहरामपुर जंक्शन से गोपालपुर की दूरी करीब 15 किलोमीटर है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी गोपालपुर की यात्रा कर सकते हैं।
19.259900,84.901200

बक्खाली : अतुलनीय खूबसूरती    बक्खाली को प्रकृति का अति दर्शनीय शहर कहा जाये तो शायद कोेई अतिश्योक्ति न होगी। जी हां, बक्खाली की खूबसूरत...