Wednesday, 20 November 2019

माजुली द्वीप : अद्भुत जल पर्यटन

   जल पर्यटन के शौकीन हैं तो माजुली द्वीप की यात्रा अवश्य करनी चाहिए। माजुली द्वीप भारतीय जल पर्यटन का एक शानदार एवं सुन्दर आयाम है। 

  माजुली द्वीप पर जल की निर्मलता एवं अविरल प्रवाह पर्यटकों को मुग्ध कर लेता है। भारत के असम के जिला माजुली का यह शानदार द्वीप अपनी एक अलग एवं अनोखी आभा रखता है। माजुली द्वीप की विशिष्टताओं से प्रभावित होकर यूनेस्को ने माजुली द्वीप को विश्व धरोहर श्रंखला में शामिल किया है। 

   विशेषज्ञों की मानें तो माजुली द्वीप को वस्तुत: सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक धरोहर कहा जाना चाहिए। माजुली द्वीप सिर्फ एक नदी क्षेत्र ही नहीं है, बल्कि विश्व का सबसे बड़ा द्वीप भी है। 
   खास यह कि माजुली द्वीप को असम का वैष्णव धर्म केन्द्र भी माना जाता है। माजुली द्वीप बेहद जीवंत है। जिससे माजुली द्वीप वैश्विक पर्यटकों कोे आकर्षित करता है।

   खास यह कि ब्राह्मपुत्र नदी माजुली द्वीप की शान एवं शोभा है। करीब 421.65 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैले इस सुन्दर द्वीप को काफी कुछ विशिष्ट माना जाता है। 
   जोरहाट से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित माजुली द्वीप की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। लिहाजा इस जल पर्यटन की यात्रा काफी आसान हो जाती है।

   खास यह कि माजुली द्वीप का जीवन उमंगों एवं संस्कृति से भरा हुआ है। जिससे माजुली द्वीप में अद्भुत जीवंतता दिखती है। माजुली द्वीप को धर्म एवं संस्कृति का पर्याय कहें तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। खास यह कि मठ एवं धरोहर इस द्वीप को दर्शनीय एवं संस्कृतिवान बना देते हैं। 

   माजुली द्वीप को शास्त्रीय नृत्य सतरिया का केन्द्र एवं गढ़ माना जाता है। मान्यता है कि असमिया संत शंकरदेव ने इस क्षेत्र में वैष्णव धर्म का प्रचार-प्रसार किया। इसके बाद उनके शिष्य माधवदेव ने इसका प्रचार-प्रसार किया। 

   माजुली को असम की सांस्कृतिक राजधानी भी कहा जाता है। संस्कृति एवं धर्म का प्रचार-प्रसार सतरों के माध्यम से किया जाता है। मान्यता है कि सतरों को देखे बिना माजुली द्वीप की यात्रा अधूरी मानी जायेगी। 
   माजुली द्वीप की व्यवस्थाएं खास तौर से दो दर्जन से अधिक सतरों के सानिध्य में संचालित होती हैं। इनकी अपनी एक अलग परम्पराएं एवं असमिया संस्कृति है।

   हालांकि असमिया संस्कृति की वैश्विक पटल पर अपनी एक खास साख एवं पहचान है। कमलाबाड़ी सतरा माजुली द्वीप का सबसे बड़ा एवं प्रभावशाली सतरा है।
   वहीं, आैनियाती सतरा पालनाम एवं अप्सरा नृत्य के लिए खास तौर से प्रसिद्ध है। बेंगानाती एवं शामागुरी सतरा भी माजुली द्वीप के खास सतरा हैं। 


   माजुली द्वीप मुख्य रूप से जनजातीय क्षेत्र है। इस द्वीप में गांव भी हैं। इतना ही नहीं, जलीय क्षेत्र में इनका अपना एक अलग रहन-सहन दिखता है। लकड़ी के खम्भों का मचान बना कर उसे आवास का स्वरूप दिया जाता है। 
   पर्यटक माजुली द्वीप के गांव में भुगतान आधारित अतिथि के तौर पर ठहर सकते हैं। आशय यह कि पर्यटक यहां विलेज टूरिज्म का भरपूर आनन्द ले सकते हैं। बसंत ऋतु माजुली द्वीप का मुख्य आकर्षण होता है। 

   माजुली द्वीप का हस्तशिल्प भी बेजोड़ है। इनमें खास तौर से मुखौटा, मिट्टी के बर्तन, मूंगा, रेशम आदि इत्यादि हैं। हस्तशिल्प एवं हथकरघा माजुली द्वीप का एक अन्य आकर्षण है। प्राकृतिक सुन्दरता के साथ ही जैव विविधिता माजुली द्वीप की विशिष्टता है। 

   माजुली द्वीप की जैव विविधिता की दर्शनीयता के लिए वैश्विक पर्यटक अति उत्साह के साथ माजुली द्वीप की यात्रा करते हैं। प्रवासी दुर्लभ पक्षियों के लिए माजुली द्वीप स्वर्ग है। दुर्लभ एवं लुप्तप्राय पक्षियों का आवागमन माजुली द्वीप पर अनवरत जारी रहता है। 

    इनमें हवासील, साइबेरियन क्रेन, ग्रेटर एडजुटेंट सारस आदि इत्यादि हैं। माजुली द्वीप की यात्रा का सबसे बेहतरीन समय नवम्बर से मार्च की अवधि होता है। जोरहाट से करीब 20 किलोेमीटर की दूरी पर स्थित माजुली द्वीप पर पर्यटक आैषधीय वनस्पतियों की सुगंध का भी एहसास करते हैं।

    माजुली द्वीप की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध है। निकटतम एयरपोर्ट जोरहाट एयरपोर्ट है। निकटतम रेलवे स्टेशन भी जोरहाट जंक्शन है। जोरहाट से माजुली द्वीप की दूरी करीब 20 किलोमीटर है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी जोरहाट की यात्रा कर माजुली द्वीप पहंुच सकते हैं।
26.836960,93.767880

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