गोवा : समुद्र तटों का सम्मोहन
निश्चय ही गोवा के समुद्र तट मुग्ध कर लेंगे। गोवा के समुद्र तटों की प्राकृतिक खूबसूरती सम्मोहित करने वाली है।
प्राकृतिक सौन्दर्य की यह विशिष्टता वैश्विक पर्यटकों को खास तौर से आकर्षित करती है। लिहाजा वर्ष पर्यंत गोवा के समुद्र तटों पर वैश्विक पर्यटकों की मौजूदगी बनी रहती है।
भारत के अति सुन्दर एवं दर्शनीय प्रांत गोवा प्राकृतिक सौन्दर्य में काफी कुछ विशिष्ट है। लिहाजा गोवा को भारतीय पर्यटन में विशिष्ट स्थान हासिल है।
वर्षा ऋतु में गोवा का प्राकृतिक सौन्दर्य आैर भी अधिक निखर आता है। गोवा में प्रकृति का सौन्दर्य कुछ अलग ही दर्शनीयता प्रदान करता है। इस प्राकृतिक सौन्दर्य को अद्भुत एवं विलक्षण कहें तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। शांति प्रिय पर्यटकों के लिए गोवा किसी स्वर्ग से कम नहीं है।
भारत के अति लघु स्वरूप वाले राज्यों में गोवा काफी कुछ विशिष्ट है। खास यह कि गोवा के यह समुद्र तट अन्तरराष्ट्रीय विशिष्टता रखते हैं। गोवा में छोटे-बड़े 40 से अधिक समुद्र तट हैं। खास यह कि गोवा के यह शानदार समुद्र तट करीब 101 किलोमीटर के दायरे में फैले हैं।
विशिष्टता के कारण ही गोवा के समुद्र तटों को वैश्विक पर्यटन में खास स्थान हासिल है। वस्तुत: गोवा के खास एवं अति दर्शनीय समुद्र तटों को देखें तो एक लम्बी श्रंृखला दिखती है। इस लम्बी श्रंृखला में पणजी से करीब 16 किलोमीटर दूर कलंगुट तट, बागा तट, पणजी तट के निकट मीरामार तट, जुआरी नदी तट, दोनापाउला तट आदि इत्यादि हैं।
इनके अलावा बागाटोर तट, अंजुना तट, सिंकरियन तट, पालोलेम तट आदि समुद्र तट तो गोवा की शान एवं शोभा हैं। इतना ही नहीं, गोवा स्थापत्य कला का भी अद्भुत एवं विलक्षण दर्शन कराता है। गोवा में धार्मिक स्थानों की भी एक लम्बी श्रंृखला विद्यमान है।
इनमें खास तौर से श्री कामाक्षी मंदिर, सप्तकेटेश्वर मंदिर, श्री शांता दुर्ग, महालसा नारायणी, परनेम का भगवती मंदिर एवं महालक्ष्मी मंदिर आदि इत्यादि हैं। गोवा का मुख्य आकर्षण मांडवी नदी है। गोवा की राजधानी पणजी है।
मांडवी नदी के तट पर रचे बसे इस शहर का प्राकृतिक सौन्दर्य देखते ही बनता है। पर्यटक मांडवी नदी में क्रूज का आनन्द ले सकते हैं। क्रूज का यह सफर बेहद रोमांचक होता है। मांडवी नदी में तैरते क्रूज पर संगीत एवं नृत्य की संस्कृति पर्यटकों को मुग्ध कर लेती है।
गोवा की यह संस्कृति पर्यटकों के दिल एवं दिमाग पर अपनी एक अमिट छाप छोड़ती है। गोवा प्राचीन काल से ही समुद्री तटों एवं स्थापत्य कला के लिए दुनिया में खास तौर से जाना पहचाना जाता है। विशेषज्ञों की मानें तो गोवा का उल्लेख महाभारत में भी मिलता है। लिहाजा गोवा का अपना एक अलग पौराणिक ऐतिहासिक महत्व है।
प्राचीनकाल में गोवा को गोपकपुरी एवं गोपकपट्टन के नाम से जाना पहचाना जाता था। गोवा को गोअंचल भी कहा गया है। मान्यता है कि भगवान परशुराम ने एक यज्ञ के दौरान अपने वाणों की वर्षा से समुद्र कोे कई स्थानों पर पीछे धकेल दिया था। परिणाम स्वरूप गोवा में कई स्थानों पर समुद्र तट काफी पीछे तक दिखते हैं।
शायद यही कारण है कि गोवा के कई स्थानों को आज भी वाणावली एवं वाणस्थली कहा जाता है। करीब 3702 वर्ग किलोमीटर दायरे में फैला गोवा अपनी आगोश में समुद्र तटों का प्राकृतिक सौन्दर्य रखता है। खास यह कि गोवा प्राकृतिक सम्पदाओं की अति समृद्धता रखता है। लौह खनिज गोवा में प्रचुरता से पाया जाता है।
गोवा का मछली उद्योग तो दुनिया में जाना पहचाना जाता है। वस्तुत: देखें तो गोवा की मुख्य पहचान पर्यटन प्रांत के तौर पर देश में है। गोवा की संस्कृति करीब 450 वर्ष प्राचीन मानी जाती है।
गोवा में यूरोपीय संस्कृति का प्रभाव पर्यटक महसूस करते हैं। गोवा में वास्तुकला की विशिष्टता पर्यटकों को मुग्ध कर लेती है। गोवा को कोंकण काशी के नाम से भी जाना पहचाना जाता है। गोवा की यात्रा पर्यटकों को एक खास रोमांचक एहसास कराती है। पर्यटक इस रोमांचक सफर को लम्बे समय तक भूल नहीं पाते।
गोवा की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट डैबोलिम एयरपोर्ट है। पणजी एयरपोर्ट से भी गोवा की यात्रा की जा सकती है। निकटतम रेलवे स्टेशन वास्को द गामा जंक्शन है। इसके अलावा पर्यटक कोंकण रेलवे का भी उपयोग गोवा की यात्रा के लिए कर सकते हैं। इसके अलावा पर्यटक गोवा की यात्रा सड़क मार्ग से भी कर सकते हैं।
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