Monday, 23 December 2019

कोझीकोड बीच: रोमांचक एहसास

   कोझीकोड बीच को प्रकृति का इन्द्रधनुषी आयाम कहा जाना चाहिए। कोझीकोड बीच शहरी भागदौड़ से पर्यटकों को एक शांत शीतल एवं मखमली स्पर्श का एहसास कराता है। 

   भारत के केरल के कालीकट का यह सुन्दर बीच देश दुनिया में खास प्रसिद्ध है। इसे केरल का एक आदर्श पर्यटन क्षेत्र माना जाता है। कोझीकोड बीच पर सूर्योदय एवं सूर्यास्त का लालित्य अति दर्शनीय होता है। 

   लिहाजा इस दर्शनीयता के लिए पर्यटकों का जमावड़ा लगता है। यूं कहें कि कोझीकोड बीच का सौन्दर्य पर्यटकों को लुभाता है तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। कोझीकोड बीच पर दक्षिण भारतीय संस्कृति पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती है।

   अरब सागर का यह समुद्र तट पर्यटकों को रोमांचित कर देता है। अरब सागर की शानदार लहरों से खेलना, जलक्रीड़ा करना, बीच की लहरों में स्नान करना आदि इत्यादि पर्यटकों को रोमांच से भर देता है। समुद्री हवाओं का आनन्द लेना हो तो कोझीकोड बीच की यात्रा का प्लान कर सकते हैं।

   कोझीकोड बीच की यात्रा केे साथ ही पर्यटक आसपास के इलाकों की यात्रा कर आनन्द की एक सुखद अनुभूति कर सकते हैं। कोझीकोड को वस्तुत: कालीकट के नाम से जाना एवं पहचाना जाता है। कोझीकोड की अपनी एक खास ऐतिहासिक, पौराणिक एवं सांस्कृतिक समृद्धता है। जिससे पर्यटक कोझीकोड की यात्रा पर खींचे चले आते हैं। 

   केरल के पूर्वी इलाके का कोझीकोड मसालों की उत्पादकता के लिए जाना एवं पहचाना जाता है। इसे मसालों की राजधानी के तौर पर दुनिया में देखा जाता है। चाय, काफी, काली मिर्च, नारियल आदि इत्यादि बहुत कुछ इस क्षेत्र की उत्पादकता में शामिल है।

    लिहाजा परिवेश मसालों की खूशबू से महकता रहता है। नारियल के स्वादिष्ट व्यंजन पर्यटकों को मुग्ध कर लेेते हैं। कालीकट का मालाबार खान पान के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। दम बिरयानी, कलममाकाया एवं चट्टी पथरी खास तौर से प्रसिद्ध हैं। कोझीकोड को दक्षिण भारत के आदर्श पर्यटन में शीर्ष पर गिना जाता है। 

   मानांचिरा स्क्वायर: मानांचिरा स्क्वायर कोझीकोड का एक मुख्य आकर्षण है। वस्तुत: यह एक अति दर्शनीय एवं खूबसूरत पूल है। इसका निर्माण राजा मानावेदावन ने किया था। 
  इसके आसपास प्राचीन मंदिर, पौराणिक इमारतें, चर्च आदि इत्यादि हैं। इसके अलावा संगीत मंच, खुला थियेटर एवं संगीतमय फव्वारा संचाचित है। लिहाजा पर्यटक भरपूर आनन्द ले सकते हैं। 
   नागों का मंदिर: नागों का मंदिर वस्तुत: भगवान शिव को समर्पित है। इसे कालीकट के प्राचीन मंदिरों में से एक माना जाता है। मंदिर की वास्तुकला दक्षिण भारतीय शैली पर आधारित है। गर्भगृह में दो फुट आकार का शिवलिंग प्रतिष्ठापित है। 
   कडलुंडी पक्षी अभयारण्य: कडलुंडी पक्षी अभयारण्य कोझीकोड की शान एवं शोभा है। पर्यटकों को यह रोमांच की सुखद अनुभूति कराता है। अरब सागर की ओर से आती कडलुंडी नदी के आसपास द्वीपों एवं पहाड़ियों पर स्थित कडलुंडी पक्षी अभयारण्य की सुन्दरता पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर लेती है।

  विभिन्न प्रजातियों के रंंगबिरंगे पक्षी इस अभयारण्य की शोभा हैं। पर्यटक यहां प्रकृति के करीब कुदरती खूबसूरती का एहसास कर सकते हैं। पक्षियों का कोलाहल-कलरव एक संगीतमय परिवेश बनाता है। यहां एक शानदार संग्रहालय भी है। 
   कालीपोयीका: कालीपोयीका वस्तुत: एक शानदार बैकवाटर्स है। पर्यटक कालीपोयीका में नौकायन का भरपूर आनन्द ले सकते हैं। नौकायन के लिए यह इलाका आदर्श माना जाता है। 
   रॉ बोटिंग, पैडल बोटिंग एवं क्रूज का आनन्द पर्यटक यहां ले सकते हैं। कालीकट से करीब दो किलोमीटर दूर स्थित कालीपोयीका रोमांच का एक शानदार स्थान है। वस्तुत: ईको फ्रैण्डली पर्यटन का शानदार हिस्सा कालीपोयीका जल पर्यटन के लिए आदर्श है।

   कोझीकोड बीच की यात्रा के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट कालीकट एयरपोर्ट है। निकटतम रेलवे स्टेशन कोझीकोड रेलवे स्टेशन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी कोझीकोड बीच की यात्रा कर सकते हैं।
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Sunday, 22 December 2019

मांडवी बीच: अद्भुत एवं विलक्षण सौन्दर्य

    मांडवी बीच का प्राकृतिक सौन्दर्य अद्भुत एवं विलक्षण कहा जाना चाहिए। जी हां, इस समुद्र तट की सुन्दरता का कहीं कोई जोड़ नहीं है। शायद इसीलिए इसे धरती का स्वर्ग कहा जाता है। 

   भारत के गुजरात के कच्छ का यह समुद्र तट वैश्विक पर्यटकों का बेहद पसंदीदा पर्यटन है। यहां की सागरतटीय सुन्दरता पर्यटकों को मुग्ध कर लेती है। कच्छ शहर से करीब दो किलोमीटर दूर स्थित मांडवी बीच अपने विशिष्ट आकर्षण से पर्यटकों को खुद ब खुद खींच लेता है। समुद्र तटों के लिए कच्छ खास तौर से प्रसिद्ध है। 

   मांडवी बीच कच्छ का खास समुुद्र तट है। जलक्रीडा का आनन्द लेना हो या तैराकी का मजा लेना हो या फिर सैर सपाटा करना हो... मांडवी बीच बेहद सुन्दर है। कच्छ की संस्कृति भी गुजरात में सबसे अलग है। शायद इसीलिए मान्यता है कि कच्छ के बिना मांडवी की यात्रा अधूरी होगी।

   गुजरात का जिला कच्छ अपनी विशिष्टताओं के लिए वैश्विक ख्याति रखता है। कच्छ का रण शायद इसी लिए प्रकृति का शानदार उपहार माना जाता है। मांडवी बीच घूमने के लिए पर्यटक सामान्यत: कभी भी यात्रा कर सकते हैं लेकिन अक्टूबर से फरवरी की अवधि बेहतर रहती है।

   सुरक्षित स्नान के लिए मांडवी बीच सबसे बेहतरीन माना जाता है। सफेद बालू मांडवी बीच की शान एवं शोभा है। सफेद बालू से सजा मांडवी बीच अपने विशिष्ट सौन्दर्य से पर्यटकों को आकर्षित करता है। मान्यता है कि कच्छ की स्थापना 1581 में की गयी थी। शासक जडेजा ने प्राकृतिक सौन्दर्य से प्रभावित होकर कच्छ की स्थापना की थी। 

   खास यह कि कच्छ को चहारदीवारी से घिरा शहर बनाया गया। मांडवी की सांस्कृतिक एवं आर्थिक समृद्धता भी बेहतरीन है। आर्थिक समृद्धता का सबसे बड़ा कारण यहां का बंदरगाह है। इस बंदरगाह की विशालता का सहज अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि एक समय में 400 से अधिक जहाज इस बंदरगाह पर खड़े हो सकते हैं।

   मांडवी में खास तौर से लकड़ी के जहाज बनाने का उद्योग अति प्रसिद्ध है। मांडवी बीच एवं उसके आसपास आकर्षक एवं लुभावने स्थलों की एक लम्बी श्रंखला विद्यमान है। इनमें खास तौर से विजय विलास पैलेस, जिनालय, रुकमावती पुल आदि इत्यादि हैं।
   विजय विलास पैलेस: विजय विलास पैलेस मांडवी का एक मुख्य आकर्षण है। एक समय यह कच्छ महाराजाओं का राजमहल हुआ करता था। राजघराना इस राजमहल का उपयोग ग्रीष्मकालीन आवास के रूप में करता था। 

   ओरछा एवं दतिया के राजमहलों की स्थापत्य कला पर आधारित स्थापत्य कला इस शानदार महल विजय विलास पैलेस का सौन्दर्य है। राजपूताना शैली पर आधारित विजय विलास पैलेस अति दर्शनीय है। सुन्दर उद्यान आदि इत्यादि इस महल की खूबियां हैं। 
   जिनालय: जिनालय वस्तुत: जैन संप्रदाय का पवित्र तीर्थधाम है। जिनालय अति दर्शनीय एवं सुन्दर है। यहां 72 विशिष्ट स्थान संरचित हैं। इनमें जैन धर्र्म के तीर्थंकर विराजमान हैं।
   रुकमावती पुल: रुकमावती पुल मांडवी का एक अन्य आकर्षण है। इस विशाल पुल की संरचना 1883 में की गयी थी। यह पुल बेहद आकर्षक है।
   जहाज निर्माण उद्योग: जहाज निर्माण उद्योग काफी कुछ खास है। मान्यता है कि जहाज का यह उद्योग 400 वर्ष से भी अधिक प्राचीन है। 
   विंड फार्म बीच: विंड फार्म बीच मांडवी का एक अन्य खास आकर्षण है। सुन्दर एवं शांत सागर तट पर्यटकों को खास तौर से आकर्षित करता है। यहां पवनचक्कियों की एक लम्बी श्रंखला विद्यमान है। यह बेहद आकर्षक प्रतीत होते हैं।

    मांडवी बीच की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट रुद्रमाता भुज में स्थित है। एयरपोर्ट से मांडवी बीच की दूरी करीब 63 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन भुज जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी मांडवी बीच की यात्रा कर सकते हैं।
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Friday, 20 December 2019

पोरबंदर बीच: प्रकृति का शानदार उपहार

   पोरबंदर बीच का प्राकृतिक सौन्दर्य धरती पर स्वर्ग कहा जाना चाहिए। जी हां, पोरबंदर बीच का प्राकृतिक सौन्दर्य अद्भुत एवं विलक्षण है। 

   खास तौर से इसे चौपाटी के रूप में जाना एवं पहचाना जाता है। भारत के गुजरात प्रांत के शहर पोरबंदर का यह सुन्दर बीच अत्यधिक दर्शनीय एवंं लुभावना है। विशेषज्ञों की मानें तो इसे भारत के सर्वाधिक घूमे जाने वाले बीच में माना जाता है। 

   पथरीली चट्टानों एवं पेड़ों से सुसज्जित पोरबंदर बीच अति दर्शनीय है। इसकी प्राकृतिक सुन्दरता वैश्विक पर्यटकों को मुग्ध कर लेती है। पोरबंदर शहर का यह बीच गुजरात की शान एवं शोभा माना जाता है। 
  पोरबंदर गुजरात का एक अति सुन्दर एवं प्राचीन शहर है। पोरबंदर बीच शहर की शान एवं शोभा होने के साथ ही सौन्दर्य शास्त्र का इन्द्रधनुषी रंग भी है। 

   दक्षिण-पश्चिम में अरब सागर से घिरा पोरबंदर पौराणिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिकता से अति समृद्ध है। शहर पोरबंदर अपनी विशिष्टताओं के कारण देश दुनिया में खास ख्याति रखता है। 

   पोरबंदर महात्मा गांधी एवं भगवान श्री कृष्ण के सखा सुदामा का जन्म स्थान भी है। जिससे पोरबंदर का महत्व कहीं अधिक बढ़ जाता है। इतना ही नहीं, पोरबंदर में पौराणिक एवं ऐतिहासिक स्थानों की भी एक लम्बी श्रंखला विद्यमान है। पोरबंदर में बीच सहित बहुत कुछ दर्शनीय है।

  हालांकि पोरबंदर बीच अति लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। पोरबंदर के मुख्य आकर्षण देखें तो माधवपुर तट, हुजूर पैलेस, पोरबंदर बंदरगाह, कीर्ति मंदिर, घुमली गणेश मंदिर, सूर्य मंदिर, सुदामा पुरी, संदीपनी विद्या निकेतन, वर्धा अभयारण्य, पक्षी अभयारण्य, दरबारगढ़ महल, नेहरू तारामण्डल आदि इत्यादि हैं।

   माधवपुर तट: माधवपुर तट वस्तुत: गुजरात की शान एवं शोभा का एक मुख्य आकर्षण है। नारियल के पेड़ों से घिरा माधवपुर समुद्र तट बेहद शांत एवं आकर्षक है।
   कीर्ति मंदिर: कीर्ति मंदिर पोरबंदर का मुख्य आकर्षण है। वस्तुत: इस मंदिर को महात्मा गांधी के लिए जाना एवं पहचाना जाता है। कीर्ति मंदिर एक गांधीवादी पुस्तकालय एवं प्रार्थना कक्ष भी है। महात्मा गांधी एवं कस्तूरबा गांधी के तैलचित्र अति दर्शनीय हैं।

   घुमली गणेश मंदिर: घुमली गणेश मंदिर 10वीं शताब्दी की एक शानदार एवं वास्तुशिल्प की अद्भुत संरचना है। लिहाजा इसकी दर्शनीयता बेजोड़ है। यह मंदिर अपने खास वास्तुशिल्प से पर्यटकों को विशेष तौर से आकर्षित करता है।
   सूर्य मंदिर: सूर्य मंदिर वस्तुत: 8वीं शताब्दी की एक सुन्दर संरचना है। पोरबंदर से करीब 50 किलोमीटर दूर स्थित सूर्य मंदिर वास्तुशिल्प के लिए खास तौर से जाना पहचाना जाता है। यह प्राचीनकाल के मंदिरों में से एक है।
   सुदामापुरी: सुदामापुरी वस्तुत: एक मंदिर है। इसका निर्माण वर्ष 1902 से 1907 की अवधि में किया गया। इस मंदिर में छोटी सी 84 भूल भुलैया भी है। यह भूल भुलैया यहां का मुख्य आकर्षण है। 
   मान्यता है कि सुदामा भगवान श्री कृष्ण के लिए एक मुट्ठी तंदुल ले कर गये थे। तंदुल के कुछ दाने आज भी मंदिर में प्रसाद के तौर पर दिये जाते हैं। 
  हुजूर महल: हुजूर महल स्थापत्यकला की एक शानदार संरचना है। यह एक दिव्य भव्य महल है। हुजूर महल की छत लकड़ी की है। महल बेहद दर्शनीय है।
   दरबार गढ़ महल: दरबार गढ़ महल का निर्माण 1671 में किया गया। दरबार गढ़ महल का प्रवेश द्वार पत्थरों का है। जिस पर खूबसूरत नक्काशी है। ऊंची मीनारें एवं लकड़ी के विशाल आंतरिक दरवाजे बेहद सुन्दर हैं। इसे राजवंश ने ग्रीष्मकालीन आवास के तौर पर विकसित किया था। 
   नेहरू तारामण्डल: नेहरू तारामण्डल वस्तुत: शहर से करीब 2 किलोमीटर दूर स्थित है। नेहरू तारामण्डल में एक विशेष शो भी संचालित होता है। 
   वर्धा वन्य जीव अभयारण्य: वर्धा वन्य जीव अभयारण्य करीब 190 वर्ग किलोमीटर में फैला है। पोरबंदर से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित अभयारण्य दो जिलों का हिस्सा है। हालांकि पोरबंदर पक्षी अभयारण्य शहर के मध्य में स्थित है। यह पक्षी अभयारण्य करीब 9 एकड़ में फैला है।

   पोरबंदर बीच की यात्रा के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट जामनगर एयरपोर्ट है। पर्यटक राजकोट एयरपोर्ट से भी पोरबंदर की यात्रा कर सकते हैं। निकटतम रेलवे स्टेशन पोरबंदर रेलवे स्टेशन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी पोेरबंदर की यात्रा कर सकते हैं।
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Tuesday, 17 December 2019

अलीबाग: प्रकृति का अनुपम उपहार

   अलीबाग को प्राकृतिक सौन्दर्य का अनुपम उपहार कहा जाना चाहिए। अलीबाग को विशिष्ट सौन्दर्य के कारण ही शायद महाराष्ट्र का गोवा कहा जाता है। 

  जी हां, अलीबाग का प्राकृतिक सौन्दर्य अद्भुत एवं विलक्षण है। भारत के महाराष्ट्र के जिला रायगढ़ का यह सुन्दर पर्यटन क्षेत्र वस्तुत: समुद्र तटीय शहर है। कोंकण क्षेत्र का यह छोटा सा समुद्र तटीय शहर महाराष्ट्र का एक आदर्श पर्यटन है। मुम्बई से करीब 110 किलोमीटर दूर स्थित अलीबाग पर्यटन की विशिष्टताएं रखता है। 

  रेतीले समुद्र तट, साफ एवं शीतल हवा, मंदिरों एवं किलों आदि इत्यादि की खासियत रखने वाला अलीबाग देश दुनिया में खास तौर से जाना एवं पहचाना जाता है। तीन दिशाओं से समुद्र से घिरा होने के कारण अलीबाग का एक विशिष्ट आकर्षण है। खास यह है कि अलीबाग में समुद्र तटों की एक लम्बी श्रंखला विद्यमान है।

   नारियल एवं सुपारी के पेड़ों से आच्छादित अलीबाग वैश्विक पर्यटकों को खास तौर से आकर्षित करता है। अलीबाग का सुहावना मौसम पर्यटकों को रोमांचित कर देता है। 
   समुद्री तटों का यह दृश्य किसी स्वर्ग से कम नहीं है। अलीबाग भोजन व्यंजन में भी विशिष्ट है। मछली एवं समुद्री भोज्य पदार्थ के स्वाद को पर्यटक लम्बे समय तक भूल नहीं पाते।

   सर्दियों में अलीबाग में मौज मस्ती का अपना एक अलग आनन्द है। अलीबाग का शाब्दिक अर्थ अली का बाग माना जाता है। मान्यता है कि इस समुद्र तटीय शहर का नाम एक अमीर इजरायली के नाम पर रखा गया था। 
   इस अमीर ने अलीबाग के इस इलाके में आम एवं नारियल के पेड़ बहुतायत में लगाये थे। इस इजरायली का नाम अली था। लिहाजा इस इलाके को अलीबाग के तौर पर जाना पहचाना जाने लगा। 

   महाराष्ट्र के पश्चिमी तट का यह हिस्सा अलीबाग वस्तुत: प्राकृतिक सौन्दर्य का एक विशिष्ट प्रतिमान है। अलीबाग के प्राकृतिक सौन्दर्य ने बॉलीवुड को भी मुग्ध किया है। 
   कारण असंख्य फिल्मों की शूटिंग में अलीबाग का प्राकृतिक सौन्दर्य कैमरे में कैद हो चुका है। अलीबाग में फिल्मी सितारों के आलीशान बंगले एवं फार्म हाउस भी हैं।

   कनकेश्वर मंदिर एवं सोमेश्वर मंदिर अलीबाग की धार्मिक आत्मा हैं। यह देव स्थान पर्यटकों को श्रद्धा से भर देते हैं। यह मंंदिर वस्तुत: भगवान शिव को समर्पित हैं। 
   अलीबाग एवं उसके आसपास आकर्षक एवं विशिष्ट स्थानों की एक लम्बी श्रंखला विद्यमान है। इनमें खास तौर से कोलाबा का किला, अलीबाग बीच, नागाओन बीच, कनकेश्वर मंदिर एवं जंजीरा का किला आदि इत्यादि हैं। 

   कोलाबा का किला: कोलाबा का किला वस्तुत: मराठा साम्राज्य का एक शानदार प्रतिमान है। अलीबाग समुद्र तट से इस किला को साफ तौर पर देखा जा सकता है। अलीबाग की एक अन्य शान खांडेरी का किला है। करीब 3 शताब्दी पुराना खांडेरी का किला अपने राजसी वैभव के लिए खास ख्याति रखता है।

   अलीबाग बीच: अलीबाग बीच समुद्र का एक शानदार तट है। यह समुद्र तट मुख्य शहर से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। समुद्र तट पर स्थित कोलाबा का किला यहां की सुन्दरता, दिव्यता-भव्यता में चार चांद लगा देता है। 

   इसे एक शानदार पिकनिक स्पॉट भी कह सकते हैं। पर्यटक अलीबाग बीच पर स्वादिष्ट एवं लजीज व्यंजनों के चटखारे भी लेे सकते हैं। इसके अलावा पर्यटक रोमांचक यात्रा का अनुभव भी हासिल कर सकते हैं। 
   नागाओन बीच: नागाओन बीच अलीबाग से करीब 8 किलोमीटर दूर स्थित है। शांतिपूर्ण वातावरण की चाहत रखनेे वालेे पर्यटन प्रेमियों के लिए नागाओन बीच किसी स्वर्ग से कम नहीं। पर्यटक नागाओन बीच पर वाटर स्कूटर की राइडिंग कर रोमांच का अनुभव ले सकते हैं। 
   कनकेश्वर वन: कनकेश्वर वन वस्तुत: अलीबाग का मुख्य आकर्षण है। आैषधीय वनस्पतियों से घिरा सघन वन क्षेत्र बेहद आकर्षक है। जीव जन्तुओं की असंख्य प्रजातियां इस वन क्षेत्र में संरक्षण पाती हैं। करीब 300 मीटर की ऊंचाई पर स्थित कनकेश्वर वन बेहद दर्शनीय है। शीर्ष पर एक शिव मंदिर भी है। 
   जंजीरा किला: जंजीरा किला अरब सागर की खूबसूरती के मध्य स्थित है। खास यह कि जंजीरा किला की यात्रा नौका से ही की जा सकती है। हालांकि किला की यात्रा के लिए नौकाएं सदैव उपलब्ध रहती हैं। 
  जंजीरा किला वस्तुत: मुगल वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है। विशाल खम्भों के साथ बना मुख्य द्वार, मूर्तियों से सुसज्जित दीवारें एवं मंदिर आदि इत्यादि इस किला की शान एवं शोभा हैं।
   अलीबाग की यात्रा के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट छत्रपति शिवाजी महाराज इण्टरनेशनल एयरपोर्ट मुम्बई है। निकटतम रेलवे स्टेशन रोहा जंक्शन एवं पनवेल रेलवे स्टेशन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी अलीबाग की यात्रा कर सकते हैं।
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बक्खाली : अतुलनीय खूबसूरती    बक्खाली को प्रकृति का अति दर्शनीय शहर कहा जाये तो शायद कोेई अतिश्योक्ति न होगी। जी हां, बक्खाली की खूबसूरत...