Friday, 20 December 2019

पोरबंदर बीच: प्रकृति का शानदार उपहार

   पोरबंदर बीच का प्राकृतिक सौन्दर्य धरती पर स्वर्ग कहा जाना चाहिए। जी हां, पोरबंदर बीच का प्राकृतिक सौन्दर्य अद्भुत एवं विलक्षण है। 

   खास तौर से इसे चौपाटी के रूप में जाना एवं पहचाना जाता है। भारत के गुजरात प्रांत के शहर पोरबंदर का यह सुन्दर बीच अत्यधिक दर्शनीय एवंं लुभावना है। विशेषज्ञों की मानें तो इसे भारत के सर्वाधिक घूमे जाने वाले बीच में माना जाता है। 

   पथरीली चट्टानों एवं पेड़ों से सुसज्जित पोरबंदर बीच अति दर्शनीय है। इसकी प्राकृतिक सुन्दरता वैश्विक पर्यटकों को मुग्ध कर लेती है। पोरबंदर शहर का यह बीच गुजरात की शान एवं शोभा माना जाता है। 
  पोरबंदर गुजरात का एक अति सुन्दर एवं प्राचीन शहर है। पोरबंदर बीच शहर की शान एवं शोभा होने के साथ ही सौन्दर्य शास्त्र का इन्द्रधनुषी रंग भी है। 

   दक्षिण-पश्चिम में अरब सागर से घिरा पोरबंदर पौराणिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिकता से अति समृद्ध है। शहर पोरबंदर अपनी विशिष्टताओं के कारण देश दुनिया में खास ख्याति रखता है। 

   पोरबंदर महात्मा गांधी एवं भगवान श्री कृष्ण के सखा सुदामा का जन्म स्थान भी है। जिससे पोरबंदर का महत्व कहीं अधिक बढ़ जाता है। इतना ही नहीं, पोरबंदर में पौराणिक एवं ऐतिहासिक स्थानों की भी एक लम्बी श्रंखला विद्यमान है। पोरबंदर में बीच सहित बहुत कुछ दर्शनीय है।

  हालांकि पोरबंदर बीच अति लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। पोरबंदर के मुख्य आकर्षण देखें तो माधवपुर तट, हुजूर पैलेस, पोरबंदर बंदरगाह, कीर्ति मंदिर, घुमली गणेश मंदिर, सूर्य मंदिर, सुदामा पुरी, संदीपनी विद्या निकेतन, वर्धा अभयारण्य, पक्षी अभयारण्य, दरबारगढ़ महल, नेहरू तारामण्डल आदि इत्यादि हैं।

   माधवपुर तट: माधवपुर तट वस्तुत: गुजरात की शान एवं शोभा का एक मुख्य आकर्षण है। नारियल के पेड़ों से घिरा माधवपुर समुद्र तट बेहद शांत एवं आकर्षक है।
   कीर्ति मंदिर: कीर्ति मंदिर पोरबंदर का मुख्य आकर्षण है। वस्तुत: इस मंदिर को महात्मा गांधी के लिए जाना एवं पहचाना जाता है। कीर्ति मंदिर एक गांधीवादी पुस्तकालय एवं प्रार्थना कक्ष भी है। महात्मा गांधी एवं कस्तूरबा गांधी के तैलचित्र अति दर्शनीय हैं।

   घुमली गणेश मंदिर: घुमली गणेश मंदिर 10वीं शताब्दी की एक शानदार एवं वास्तुशिल्प की अद्भुत संरचना है। लिहाजा इसकी दर्शनीयता बेजोड़ है। यह मंदिर अपने खास वास्तुशिल्प से पर्यटकों को विशेष तौर से आकर्षित करता है।
   सूर्य मंदिर: सूर्य मंदिर वस्तुत: 8वीं शताब्दी की एक सुन्दर संरचना है। पोरबंदर से करीब 50 किलोमीटर दूर स्थित सूर्य मंदिर वास्तुशिल्प के लिए खास तौर से जाना पहचाना जाता है। यह प्राचीनकाल के मंदिरों में से एक है।
   सुदामापुरी: सुदामापुरी वस्तुत: एक मंदिर है। इसका निर्माण वर्ष 1902 से 1907 की अवधि में किया गया। इस मंदिर में छोटी सी 84 भूल भुलैया भी है। यह भूल भुलैया यहां का मुख्य आकर्षण है। 
   मान्यता है कि सुदामा भगवान श्री कृष्ण के लिए एक मुट्ठी तंदुल ले कर गये थे। तंदुल के कुछ दाने आज भी मंदिर में प्रसाद के तौर पर दिये जाते हैं। 
  हुजूर महल: हुजूर महल स्थापत्यकला की एक शानदार संरचना है। यह एक दिव्य भव्य महल है। हुजूर महल की छत लकड़ी की है। महल बेहद दर्शनीय है।
   दरबार गढ़ महल: दरबार गढ़ महल का निर्माण 1671 में किया गया। दरबार गढ़ महल का प्रवेश द्वार पत्थरों का है। जिस पर खूबसूरत नक्काशी है। ऊंची मीनारें एवं लकड़ी के विशाल आंतरिक दरवाजे बेहद सुन्दर हैं। इसे राजवंश ने ग्रीष्मकालीन आवास के तौर पर विकसित किया था। 
   नेहरू तारामण्डल: नेहरू तारामण्डल वस्तुत: शहर से करीब 2 किलोमीटर दूर स्थित है। नेहरू तारामण्डल में एक विशेष शो भी संचालित होता है। 
   वर्धा वन्य जीव अभयारण्य: वर्धा वन्य जीव अभयारण्य करीब 190 वर्ग किलोमीटर में फैला है। पोरबंदर से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित अभयारण्य दो जिलों का हिस्सा है। हालांकि पोरबंदर पक्षी अभयारण्य शहर के मध्य में स्थित है। यह पक्षी अभयारण्य करीब 9 एकड़ में फैला है।

   पोरबंदर बीच की यात्रा के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट जामनगर एयरपोर्ट है। पर्यटक राजकोट एयरपोर्ट से भी पोरबंदर की यात्रा कर सकते हैं। निकटतम रेलवे स्टेशन पोरबंदर रेलवे स्टेशन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी पोेरबंदर की यात्रा कर सकते हैं।
21.634910,69.605550

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