कोवलम : एक अद्भुत स्वप्निल संसार
कोवलम को अद्भुत एवं विलक्षण स्वप्निल संसार कहा जाना चाहिए। जी हां, कोवलम की सुन्दरता किसी को मुग्ध कर लेती है।
कोवलम वस्तुत: समुद्र तटों एवं ताड़ के सुन्दर एवं शानदार पेड़ों के लिए प्रसिद्ध है। भारत के केरल प्रांत के तिरुवनंतपुरम जिला का यह शानदार पर्यटन बेहद लुभावना है। खास यह कि कोवलम विश्व के सबसे दर्शनीय तटों में गिना जाता है। सुनहरी रेत का स्पर्श करती सागर की नीली लहरें देख पर्यटक सम्मोहित हो जाते हैं।
कोवलम का प्राकृतिक सौन्दर्य देख कर पर्यटक खिचे चले आते हैं। यहां की खूबसूरती में खास सम्मोहन है। पर्यटक कोवलम पर जलक्रीड़ा का भरपूर आनन्द ले सकते हैं। ब्रिटिश शासन में ब्रिटिश अफसर कोवलम के प्राकृतिक सौन्दर्य से अत्यधिक प्रभावित थे। लिहाजा कोवलम को इंटरनेशनल पर्यटन के मानचित्र पर स्थापित किया।
कोवलम का प्राकृतिक सौन्दर्य अद्भुत एवं विलक्षण है। विशेषज्ञों की मानें तो कोवलम का शाब्दिक अर्थ नारियल वृक्षों का समूह होता है। यह शाब्दिक अर्थ कोवलम में यथार्थ में दर्शित होता है। कोवलम समुद्र तट को एक आदर्श पर्यटन कहें तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी।
कोवलम समुद्र तट वस्तुत: पानी के खेलों के लिए प्रसिद्ध है। जश्न मनाने के लिए इससे बेहतरीन स्थान कुछ आैर नहीं हो सकता। अर्धचन्द्राकार समुद्र का यहां एक अलग ही सम्मोहन दिखता है। खास यह कि कोवलम पर देश की विविध संस्कृतियों का संगम दिखता है।
कोवलम समुद्र तट पर आलीशान होटलों की एक लम्बी श्रंृखला विद्यमान है। लिहाजा इन होटलों में ठहर कर पर्यटक कोवलम के समुद्री हलचल का भरपूर आनन्द लेे सकते हैं।
कोवलम समुद्र तट एवं उसके आसपास दर्शनीय एवं विशिष्ट स्थलों की एक लम्बी श्रंृखला है। इनमें खास तौर से पद्मनाभ स्वामी महल, शंकुमुघम तट, विहिन्जम लाइट हाउस, वरकल तट, पद्मनाभ स्वामी मंदिर, वेली लगून, श्री चित्र कला दीर्घा, सरकारी कला संग्रहालय, पेपारा वन्य जीव अभयारण्य, कुथिरा मलिका महल आदि इत्यादि हैं।
पद्मनाभ स्वामी महल: पद्मनाभ स्वामी महल कोवलम की वेली पहाड़ियों के निकट स्थित है। वेली पहाड़ियों के तल पर स्थित इस भव्य दिव्य महल की स्थापत्य कला एवं नक्काशी का कोई जोड़ नहीं। प्राचीनकाल में त्रावनकोर शासकों का यह निवास था। इस महल की दीवारों पर अंकित चित्रांकन अति दर्शनीय है।
शंकुमुघम समुद्र तट: शंकुमुघम समुद्र तट वस्तुत: कोवलम की शान एवं शोभा है। सांझ होते ही इस समुद्र तट पर जैसे स्वर्ग उतर आता हो। इस स्थान से सूर्योदय एवं सूर्यास्त की दर्शनीयता ह्मदयस्पर्शी होती है। सुनहरी रेत एवं किरणों की लालिमा अति सुन्दर लगती है।
विहिन्जम लाइट हाउस: विहिन्जम लाइट हाउस अरब सागर तट का सुन्दर लाइट हाउस है। इस इलाके को लाइट हाउस तट कहा जाता है। खास यह कि लाइट हाउस से कोवलम की प्राकृतिक सुन्दरता को पर्यटक निहार सकते हैं। यहां से कोवलम के खूबसूरत गांव भी देख सकते हैं।
वरकल समुद्र तट: वरकल समुद्र तट वस्तुत: त्रिवेन्द्रम से करीब 55 किलोमीटर दूर स्थित एक शानदार समुद्र तट है। इसे केरल के अति सुन्दर समुद्र तटों में से एक माना जाता है।
पद्मनाभ स्वामी मंदिर: पद्मनाभ स्वामी मंदिर वस्तुत: भगवान विष्णु को समर्पित है। यह मंदिर भगवान विष्णु के 108 दिव्य स्थानों में एक है। इस मंदिर में भगवान विष्णु की लेटी मुद्रा में प्रतिमा स्थापित है। खास यह इस मंदिर का रखरखाव एवं देखरेख राज परिवार के अधीन है। कोवलम से करीब 14 किलोमीटर दूर त्रिवेन्द्रम में स्थित इस सात मंजिला मंदिर को ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व हासिल है। इस मंदिर की स्थापत्य कला में द्रविड कला के दर्शन होते है।
पद्मनाभ स्वामी मंदिर: पद्मनाभ स्वामी मंदिर वस्तुत: भगवान विष्णु को समर्पित है। यह मंदिर भगवान विष्णु के 108 दिव्य स्थानों में एक है। इस मंदिर में भगवान विष्णु की लेटी मुद्रा में प्रतिमा स्थापित है। खास यह इस मंदिर का रखरखाव एवं देखरेख राज परिवार के अधीन है। कोवलम से करीब 14 किलोमीटर दूर त्रिवेन्द्रम में स्थित इस सात मंजिला मंदिर को ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व हासिल है। इस मंदिर की स्थापत्य कला में द्रविड कला के दर्शन होते है।
वेली लगून: वेली लगून वस्तुत: कोवलम का एक शानदार एवं आदर्श पिकनिक प्वाइंट है। शानदार बगीचे, उत्कृष्ट मूर्ति कला, पानी पर झूलते शानदार पुल यहां के मुख्य आकर्षण हैं।
सरकारी कला संग्रहालय: सरकारी कला संग्रहालय को वास्तुकला की दृष्टि से एक विशेष रत्न माना जाता है। इस संग्रहालय को नैपियर म्युजियम के नाम से भी जाना पहचाना जाता है। इस संग्रहालय में केरल की परम्परागत शैली, चाइनीज एवं मुगल शैली का अंकन देखा जा सकता है।
सरकारी कला संग्रहालय: सरकारी कला संग्रहालय को वास्तुकला की दृष्टि से एक विशेष रत्न माना जाता है। इस संग्रहालय को नैपियर म्युजियम के नाम से भी जाना पहचाना जाता है। इस संग्रहालय में केरल की परम्परागत शैली, चाइनीज एवं मुगल शैली का अंकन देखा जा सकता है।
पेपारा वन्य जीव अभयारण्य: पेपारा वन्य जीव अभयारण्य पश्चिमी घाट का एक शानदार इलाका है। करीब 53 वर्ग किलोमीटर दायरे में फैले इस अभयारण्य में विशाल पहाड़ियों एवं आैषधीय वनस्पतियों की प्रचुरता है। अभयारण्य में हाथी, सांभर, तेंदुआ, मकाक आदि दर्शनीय हैं।
कुथिरा मलिका महल : कुथिरा मलिका महल एक अति प्राचीन महल है। इसकी स्थापत्य कला देखते ही बनती है। इस महल को पूथेन मलिका के नाम से भी जाना पहचाना जाता है। इस महल का निर्माण त्रावणकोर के राजा स्वाथि थिरुनल के शासनकाल में किया गया था। महल में त्रावणकोर शैली देखनेे को मिलती है। इस महल में राजसी चित्रकला देखने को मिलती है।
कुथिरा मलिका महल : कुथिरा मलिका महल एक अति प्राचीन महल है। इसकी स्थापत्य कला देखते ही बनती है। इस महल को पूथेन मलिका के नाम से भी जाना पहचाना जाता है। इस महल का निर्माण त्रावणकोर के राजा स्वाथि थिरुनल के शासनकाल में किया गया था। महल में त्रावणकोर शैली देखनेे को मिलती है। इस महल में राजसी चित्रकला देखने को मिलती है।
कोवलम समुद्र तट की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट त्रिवेन्द्रम इण्टरनेशनल एयरपोर्ट है। त्रिवेन्द्रम एयरपोर्ट से कोवलम की दूरी करीब 15 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन त्रिवेन्द्रम रेलवे जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी कोवलम की यात्रा कर सकते हैं।
8.393040,76.974460
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