Thursday, 19 September 2019

कोवलम : एक अद्भुत स्वप्निल संसार

   कोवलम को अद्भुत एवं विलक्षण स्वप्निल संसार कहा जाना चाहिए। जी हां, कोवलम की सुन्दरता किसी को मुग्ध कर लेती है। 

   कोवलम वस्तुत: समुद्र तटों एवं ताड़ के सुन्दर एवं शानदार पेड़ों के लिए प्रसिद्ध है। भारत के केरल प्रांत के तिरुवनंतपुरम जिला का यह शानदार पर्यटन बेहद लुभावना है। खास यह कि कोवलम विश्व के सबसे दर्शनीय तटों में गिना जाता है। सुनहरी रेत का स्पर्श करती सागर की नीली लहरें देख पर्यटक सम्मोहित हो जाते हैं। 

   कोवलम का प्राकृतिक सौन्दर्य देख कर पर्यटक खिचे चले आते हैं। यहां की खूबसूरती में खास सम्मोहन है। पर्यटक कोवलम पर जलक्रीड़ा का भरपूर आनन्द ले सकते हैं। ब्रिटिश शासन में ब्रिटिश अफसर कोवलम के प्राकृतिक सौन्दर्य से अत्यधिक प्रभावित थे। लिहाजा कोवलम को इंटरनेशनल पर्यटन के मानचित्र पर स्थापित किया। 

   कोवलम का प्राकृतिक सौन्दर्य अद्भुत एवं विलक्षण है। विशेषज्ञों की मानें तो कोवलम का शाब्दिक अर्थ नारियल वृक्षों का समूह होता है। यह शाब्दिक अर्थ कोवलम में यथार्थ में दर्शित होता है। कोवलम समुद्र तट को एक आदर्श पर्यटन कहें तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी।

   कोवलम समुद्र तट वस्तुत: पानी के खेलों के लिए प्रसिद्ध है। जश्न मनाने के लिए इससे बेहतरीन स्थान कुछ आैर नहीं हो सकता। अर्धचन्द्राकार समुद्र का यहां एक अलग ही सम्मोहन दिखता है। खास यह कि कोवलम पर देश की विविध संस्कृतियों का संगम दिखता है।

   कोवलम समुद्र तट पर आलीशान होटलों की एक लम्बी श्रंृखला विद्यमान है। लिहाजा इन होटलों में ठहर कर पर्यटक कोवलम के समुद्री हलचल का भरपूर आनन्द लेे सकते हैं।

   कोवलम समुद्र तट एवं उसके आसपास दर्शनीय एवं विशिष्ट स्थलों की एक लम्बी श्रंृखला है। इनमें खास तौर से पद्मनाभ स्वामी महल, शंकुमुघम तट, विहिन्जम लाइट हाउस, वरकल तट, पद्मनाभ स्वामी मंदिर, वेली लगून, श्री चित्र कला दीर्घा, सरकारी कला संग्रहालय, पेपारा वन्य जीव अभयारण्य, कुथिरा मलिका महल आदि इत्यादि हैं। 
   पद्मनाभ स्वामी महल: पद्मनाभ स्वामी महल कोवलम की वेली पहाड़ियों के निकट स्थित है। वेली पहाड़ियों के तल पर स्थित इस भव्य दिव्य महल की स्थापत्य कला एवं नक्काशी का कोई जोड़ नहीं। प्राचीनकाल में त्रावनकोर शासकों का यह निवास था। इस महल की दीवारों पर अंकित चित्रांकन अति दर्शनीय है।

   शंकुमुघम समुद्र तट: शंकुमुघम समुद्र तट वस्तुत: कोवलम की शान एवं शोभा है। सांझ होते ही इस समुद्र तट पर जैसे स्वर्ग उतर आता हो। इस स्थान से सूर्योदय एवं सूर्यास्त की दर्शनीयता ह्मदयस्पर्शी होती है। सुनहरी रेत एवं किरणों की लालिमा अति सुन्दर लगती है। 

  विहिन्जम लाइट हाउस: विहिन्जम लाइट हाउस अरब सागर तट का सुन्दर लाइट हाउस है। इस इलाके को लाइट हाउस तट कहा जाता है। खास यह कि लाइट हाउस से कोवलम की प्राकृतिक सुन्दरता को पर्यटक निहार सकते हैं। यहां से कोवलम के खूबसूरत गांव भी देख सकते हैं।
   वरकल समुद्र तट: वरकल समुद्र तट वस्तुत: त्रिवेन्द्रम से करीब 55 किलोमीटर दूर स्थित एक शानदार समुद्र तट है। इसे केरल के अति सुन्दर समुद्र तटों में से एक माना जाता है।
  पद्मनाभ स्वामी मंदिर: पद्मनाभ स्वामी मंदिर वस्तुत: भगवान विष्णु को समर्पित है। यह मंदिर भगवान विष्णु के 108 दिव्य स्थानों में एक है। इस मंदिर में भगवान विष्णु की लेटी मुद्रा में प्रतिमा स्थापित है। खास यह इस मंदिर का रखरखाव एवं देखरेख राज परिवार के अधीन है। कोवलम से करीब 14 किलोमीटर दूर त्रिवेन्द्रम में स्थित इस सात मंजिला मंदिर को ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व हासिल है। इस मंदिर की स्थापत्य कला में द्रविड कला के दर्शन होते है। 

  वेली लगून: वेली लगून वस्तुत: कोवलम का एक शानदार एवं आदर्श पिकनिक प्वाइंट है। शानदार बगीचे, उत्कृष्ट मूर्ति कला, पानी पर झूलते शानदार पुल यहां के मुख्य आकर्षण हैं।
   सरकारी कला संग्रहालय: सरकारी कला संग्रहालय को वास्तुकला की दृष्टि से एक विशेष रत्न माना जाता है। इस संग्रहालय को नैपियर म्युजियम के नाम से भी जाना पहचाना जाता है। इस संग्रहालय में केरल की परम्परागत शैली, चाइनीज एवं मुगल शैली का अंकन देखा जा सकता है।
   पेपारा वन्य जीव अभयारण्य: पेपारा वन्य जीव अभयारण्य पश्चिमी घाट का एक शानदार इलाका है। करीब 53 वर्ग किलोमीटर दायरे में फैले इस अभयारण्य में विशाल पहाड़ियों एवं आैषधीय वनस्पतियों की प्रचुरता है। अभयारण्य में हाथी, सांभर, तेंदुआ, मकाक आदि दर्शनीय हैं।
   कुथिरा मलिका महल : कुथिरा मलिका महल एक अति प्राचीन महल है। इसकी स्थापत्य कला देखते ही बनती है। इस महल को पूथेन मलिका के नाम से भी जाना पहचाना जाता है। इस महल का निर्माण त्रावणकोर के राजा स्वाथि थिरुनल के शासनकाल में किया गया था। महल में त्रावणकोर शैली देखनेे को मिलती है। इस महल में राजसी चित्रकला देखने को मिलती है।
   कोवलम समुद्र तट की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट त्रिवेन्द्रम इण्टरनेशनल एयरपोर्ट है। त्रिवेन्द्रम एयरपोर्ट से कोवलम की दूरी करीब 15 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन त्रिवेन्द्रम रेलवे जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी कोवलम की यात्रा कर सकते हैं।
8.393040,76.974460

Wednesday, 18 September 2019

एलेप्पी बैकवॉटर्स : वॉटर टूरिज्म

   एलेप्पी बैकवॉटर्स को 'वॉटर टूरिज्म" का श्रेष्ठतम आयाम कहें तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। एलेप्पी बैकवॉटर्स के हाउसबोट में सैर सपाटा करना बेहद रोमांचक एहसास कराता है। 

   एलेप्पी बैकवॉटर्स एक स्वप्नलोक की सैर सा प्रतीत होता है। भारत के केरल प्रांत का यह शानदार पर्यटन खास तौर से वैश्विक पर्यटकों को आकर्षित करता है। इसे केरल का सर्वश्रेष्ठ पर्यटन माना जाता है।

  खास यह कि एलेप्पी बैकवॉटर्स की प्राकृतिक सुन्दरता पर्यटकों के दिलों में छा जाती है। अवकाश को शानदार एवं अविस्मरणीय बनाने के लिए एलेप्पी बैकवॉटर्स की यात्रा अवश्य करनी चाहिए। चौतरफा वॉटर लेेक्स पर्यटकों में एक खास रोमांच पैदा करते हैं।

   धान के खेतों की खूशबू, विचित्र चैपल, गांवों का प्राकृतिक सौन्दर्य, लिली से आच्छादित झीलो का सौन्दर्य एलेप्पी बैकवॉटर्स की शान एवं शोभा है। पर्यटक इस दौरान स्थानीय लोक संस्कृति का आनन्द ले सकते हैं तो वहीं दक्षिण भारतीय भोजन के चटखारे भी ले सकते हैं।

   केेले के पत्तों पर नारियल के स्वादिष्ट व्यंजनों का स्वाद पर्यटक भूल नहीं पाते। इतना ही नहीं, एलेप्पी बैकवॉटर्स प्राचीनता का भी दर्शन कराता है। पुराने पाथवे बेहद आकर्षक लगते हैं। खास यह कि एलेप्पी बैकवॉटर्स को अलप्पुुझा भी कहा जाता है। एलेप्पी वस्तुत: केरल का एक सुन्दर शहर है।

   बैकवॉटर्स केे खूबसूरती से रंगा एलेप्पी बेहद आकर्षक लगता है। खास यह कि झीलों-झरनों एवं नहरों का समग्र संगमन स्थल एलेप्पी बैकवॉटर्स अति दर्शनीय है। विशेषज्ञों की मानें तो नहरों एवं झीलों-झरनों के इस संगम को बैकवॉटर्स के नाम से जाना पहचाना जाता है। 

   एलेप्पी बैकवॉटर्स की जीवंतता खास तौर से एक शानदार आयुर्वेदिक रिसाटर्स के रूप में है। शांत एवं शीतल एलेप्पी बैकवॉटर्स में हाउसबोट में भ्रमण करना एक शानदार एवं सुखद अनुुभूति से भर देता है। वस्तुत: देखें तो एलेप्पी बैकवॉटर्स अरब सागर का एक छोटा हिस्सा है। कारण झीलों-झरनों, नहरों आदि इत्यादि का कहीं कोई अंत नहीं दिखता है।

   एलेप्पी बैकवॉटर्स को समुद्र तट के तौर पर भी देखा जाता है। मालाबार समुद्र तट के शानदार बैकवॉटर्स को एक रत्न की भांति माना जाता है। एलेप्पी बैकवॉटर्स में नावों की परम्परागत दौड़ देखना मन मस्तिष्क को प्रफुल्लित करता है।

   खास तौर से सितम्बर की अवधि में नौका दौड़ की प्रतियोगिताएं भी आयोजित होती हैं। जोश एवं उत्साह से भरी यह प्रतियोगिता बेहद रोमांचकारी होती है। नौका दौड़ की इन प्रतियोगिताओं कोे देखने के लिए देश दुनिया के पर्यटक खास तौर से आते हैं। 

   शायद इसी लिए एलेप्पी बैकवॉटर्स को वेनिस भी कहा जाता है। परस्पर झीलों का जुड़ाव एलेप्पी बैकवॉटर्स को भूल-भुलैया सा बना देता है। शायद इसी लिए एलेप्पी या अलाप्पुुझा को किसी प्रसिद्ध यूरोपीय शहर के सौन्दर्य से अलंकृत किया जाता है। 


   एलेप्पी बैकवॉटर्स में सुन्दरता, इतिहास एवं संस्कृति का अद्भुत एवं विलक्षण संगम दिखता है। एलेप्पी बैकवॉटर्स को एक शानदार हॉट स्पॉट के तौर पर विकसित किया गया है। एलेप्पी बैकवॉटर्स में शानदार रिसार्ट्स की एक लम्बी श्रंखला विद्यमान है। इन रिसार्ट्स में पर्यटक ठहर कर बैकवॉटर्स का भरपूर आनन्द ले सकते हैं। एलेप्पी बैकवॉटर्स खास तौर हाउसबोट्स में रात्रि प्रवास के लिए प्रसिद्ध है।

    प्राकृतिक सुन्दरता का यह आयाम किसी स्वर्ग से कम नहीं है। इन हाउसबोट्स के कमरे बेहद आरामदायक एवं आलीशान होते हैं। इस दौरान स्वादिष्ट व्यंजनों का चटखारे यात्रा के आनन्द को कई गुना बढ़ा देते हैं। 
   एलेप्पी बैकवॉटर्स की यात्रा के दौरान सूर्यास्त एवं सूर्योदय का अद्भुत दृश्य देखना बेहद सुन्दर प्रतीत होता है। एलेप्पी का हस्तशिल्प भी बेहद आकर्षक होता है। एलेप्पी बैकवॉटर्स की यात्रा का बेहतरीन समय सितम्बर से मई की अवधि होता है। इस अवधि में पर्यटक यात्रा का भरपूर आनन्द ले सकते हैं।

   एलेप्पी बैकवॉटर्स की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट कोच्चि एयरपोर्ट है। कोच्चि एयरपोर्ट से एलेप्पी बैकवॉटर्स की दूरी करीब 53 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन एलेप्पी जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी एलेप्पी बैकवॉटर्स की यात्रा कर सकते हैं।
9.484800,76.322300

Tuesday, 17 September 2019

कुमारकोम झील : प्राकृतिक सौन्दर्य का अद्भुत संगम

   कुमारकोम झील का प्राकृतिक सौन्दर्य अद्भुत एवं विलक्षण कहा जाना चाहिए। जी हां, इसे शानदार जल पर्यटन भी कह सकते हैं। 

   आैषधीय वनस्पतियों, वन्य जीवों एवं समुद्री तट का यह अद्भुत संगम सिर्फ कुमारकोम झील पर ही दर्शनीय है। भारत के केरल प्रांत के इस छोटे किन्तु अति दर्शनीय पर्यटन में खूबियों की एक लम्बी श्रंृखला विद्यमान है।

   कुमारकोम वस्तुत: केरल का शांत एवं सुन्दर शहर है। बेम्बानाड झील के निकट स्थित कुमारकोम झील बेहद आकर्षक है। कुमारकोम झील का मौसम शांत एवं शीतल रहने के साथ ही देसी विदेशी आैषधीय वनस्पतियों एवं फूलों की सुगंध से महकता रहता है। कुमारकोम झील को केरल का आदर्श पर्यटन क्षेत्र माना जाता है।

   खास यह कि कुमारकोम झील की आगोश में प्राकृतिक सौन्दर्य का हर आयाम विद्यमान है। पर्यटक बैकवॉटर्स का भरपूर आनन्द ले सकते हैं। कुमारकोम झील में नौका विहार, जल भ्रमण, हाउस बोट में यात्रा एवं विश्राम एवं जलक्रीड़ा का लुफ्त पर्यटक ले सकते हैं। 

  यात्रा के दौरान पर्यटक स्वादिष्ट एवं ताजे नारियल का स्वाद लेकर सैर सपाटा का आनन्द दोगुना कर सकते हैं। केरल की इस भोजन संस्कृति एवं खान-पान को पर्यटक कभी न भूल पायेंगे। केरल का छोटा एवं अति खूबसूरत शहर कुमारकोम वस्तुत: जल क्षेत्र में रचा-बसा अति सुन्दर पर्यटन क्षेत्र है।

   कुट्टानद क्षेत्र में स्थित कुमारकोम झील कोट्टायम से करीब 14 किलोमीटर दूर है। कभी कुमारकोम झील इलाके को रबर उत्पादन के गढ़ के तौर पर देश दुनिया में जाना पहचाना जाता था लेकिन अब कुमारकोम झील एक शानदार पर्यटन एवं वन्य जीव अभयारण्य के तौर पर विशेष ख्याति रखती है। 

   विशाल समुद्री तट एवं चौतरफा शांत-शीतल जल का प्रवाह कुमारकोम झील की शान एवं शोभा है। कुमारकोम झील एक पक्षी अनुसंधान केन्द्र की ख्याति भी रखता है। प्राकृतिक सौन्दर्य का यह अनुपम संगम वैश्विक पर्यटकों को खास तौर से आकर्षित करता है।

   कुमारकोम झील एवं उसके आसपास आकर्षक एवं दर्शनीय स्थलों की एक लम्बी श्रंृखला विद्यमान है। लुभावने जलमार्ग, सुन्दर झीलें, सुगंधित नारियल के पेड़, धान की खेती, प्राकृतिक शांत-शीतल हवाओं का प्रवाह पर्यटकों को मुग्ध कर लेता है। कुमारकोम झील में ठहरने के लिए बेहद सुन्दर रिसार्ट्स पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर लेते हैं। 

   कुमारकोम पक्षी अभयारण्य: कुमारकोम पक्षी अभयारण्य करीब 14 एकड़ में फैला सुरम्य क्षेत्र है। बेम्बानंद झील के पूर्वी किनारे पर स्थित पक्षी अभयारण्य दुर्लभ पक्षियों का शानदार आशियाना है। प्रवासी पक्षियों का कोलाहल-कलरव मुग्ध कर लेता है।
   बैकवॉटर्स : बैकवॉटर्स की यात्रा बेहद रोमांचक होती है। मीलों लम्बे फैले समुद्री तट जल पर्यटन का भरपूर आनन्द प्रदान करते हैं। इस दौरान क्रूज, हाउस वोट आदि इत्यादि में ठहरना असाधारण अनुभव होता है। यहां की प्राकृतिक छटा एवं अनुपम वातावरण पर्यटकों को मुग्ध कर लेती है।

   बेम्बानंद झील: बेम्बानंद झील वस्तुत: कई नदियों एवं नहरों का संगम है। बेम्बानंद झील एक आदर्श पिकनिक स्पॉट है। पर्यटक इस शानदार झील में वोटिंंंग, फिशिंग एवं साइटसिकिंग का आनन्द ले सकते हैं। 
  अरुविक्कुजी वॉटर फॉल्स: अरुविक्कुजी वॉटर फॉल्स कोट्टायम से करीब 18 किलोमीटर दूर स्थित है। कुमारकोम झील से शानदार वॉटर फॉल्स की दूरी करीब 2 किलोमीटर है। करीब 100 फुट की ऊंचाई से गिरने वाले इस वॉटर फॉल्स की सुन्दरता अति दर्शनीय है। 
   झरना की प्रतिध्वनि एक सुमधुर संगीत पैदा करती है। संगीत की यह प्रतिध्वनि पर्यटकों को मुग्ध कर लेती है। रबर की शानदार वनस्पतियां इस आदर्श पिकनिक स्पॉट की शान एवं शोभा हैं। कुमारकोम झील की यात्रा का बेहतरीन समय सितम्बर से मई की अवधि है। इस दौरान पर्यटक यात्रा का भरपूर आनन्द ले सकते हैं।

   कुमारकोम झील की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट कोच्चि एयरपोर्ट है। कोेच्चि एयरपोर्ट से कुमारकोम झील की दूरी करीब 85 किलोमीटर है।
   निकटतम रेलवे स्टेशन कोट्टायम रेलवे जंक्शन है। रेलवे स्टेशन से कुमारकोम झील की दूरी करीब 16 किलोमीटर है। पर्यटक सड़़क मार्ग से भी कुमारकोम झील की यात्रा कर सकते हैं।
9.594600,76.430946

Monday, 9 September 2019

गोवा : समुद्र तटों का सम्मोहन

   निश्चय ही गोवा के समुद्र तट मुग्ध कर लेंगे। गोवा के समुद्र तटों की प्राकृतिक खूबसूरती सम्मोहित करने वाली है। 

   प्राकृतिक सौन्दर्य की यह विशिष्टता वैश्विक पर्यटकों को खास तौर से आकर्षित करती है। लिहाजा वर्ष पर्यंत गोवा के समुद्र तटों पर वैश्विक पर्यटकों की मौजूदगी बनी रहती है।
  भारत के अति सुन्दर एवं दर्शनीय प्रांत गोवा प्राकृतिक सौन्दर्य में काफी कुछ विशिष्ट है। लिहाजा गोवा को भारतीय पर्यटन में विशिष्ट स्थान हासिल है।

   वर्षा ऋतु में गोवा का प्राकृतिक सौन्दर्य आैर भी अधिक निखर आता है। गोवा में प्रकृति का सौन्दर्य कुछ अलग ही दर्शनीयता प्रदान करता है। इस प्राकृतिक सौन्दर्य को अद्भुत एवं विलक्षण कहें तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। शांति प्रिय पर्यटकों के लिए गोवा किसी स्वर्ग से कम नहीं है।

   भारत के अति लघु स्वरूप वाले राज्यों में गोवा काफी कुछ विशिष्ट है। खास यह कि गोवा के यह समुद्र तट अन्तरराष्ट्रीय विशिष्टता रखते हैं। गोवा में छोटे-बड़े 40 से अधिक समुद्र तट हैं। खास यह कि गोवा के यह शानदार समुद्र तट करीब 101 किलोमीटर के दायरे में फैले हैं। 

  विशिष्टता के कारण ही गोवा के समुद्र तटों को वैश्विक पर्यटन में खास स्थान हासिल है। वस्तुत: गोवा के खास एवं अति दर्शनीय समुद्र तटों को देखें तो एक लम्बी श्रंृखला दिखती है। इस लम्बी श्रंृखला में पणजी से करीब 16 किलोमीटर दूर कलंगुट तट, बागा तट, पणजी तट के निकट मीरामार तट, जुआरी नदी तट, दोनापाउला तट आदि इत्यादि हैं। 

   इनके अलावा बागाटोर तट, अंजुना तट, सिंकरियन तट, पालोलेम तट आदि समुद्र तट तो गोवा की शान एवं शोभा हैं। इतना ही नहीं, गोवा स्थापत्य कला का भी अद्भुत एवं विलक्षण दर्शन कराता है। गोवा में धार्मिक स्थानों की भी एक लम्बी श्रंृखला विद्यमान है।

   इनमें खास तौर से श्री कामाक्षी मंदिर, सप्तकेटेश्वर मंदिर, श्री शांता दुर्ग, महालसा नारायणी, परनेम का भगवती मंदिर एवं महालक्ष्मी मंदिर आदि इत्यादि हैं। गोवा का मुख्य आकर्षण मांडवी नदी है। गोवा की राजधानी पणजी है। 

   मांडवी नदी के तट पर रचे बसे इस शहर का प्राकृतिक सौन्दर्य देखते ही बनता है। पर्यटक मांडवी नदी में क्रूज का आनन्द ले सकते हैं। क्रूज का यह सफर बेहद रोमांचक होता है। मांडवी नदी में तैरते क्रूज पर संगीत एवं नृत्य की संस्कृति पर्यटकों को मुग्ध कर लेती है।

   गोवा की यह संस्कृति पर्यटकों के दिल एवं दिमाग पर अपनी एक अमिट छाप छोड़ती है। गोवा प्राचीन काल से ही समुद्री तटों एवं स्थापत्य कला के लिए दुनिया में खास तौर से जाना पहचाना जाता है। विशेषज्ञों की मानें तो गोवा का उल्लेख महाभारत में भी मिलता है। लिहाजा गोवा का अपना एक अलग पौराणिक ऐतिहासिक महत्व है। 

   प्राचीनकाल में गोवा को गोपकपुरी एवं गोपकपट्टन के नाम से जाना पहचाना जाता था। गोवा को गोअंचल भी कहा गया है। मान्यता है कि भगवान परशुराम ने एक यज्ञ के दौरान अपने वाणों की वर्षा से समुद्र कोे कई स्थानों पर पीछे धकेल दिया था। परिणाम स्वरूप गोवा में कई स्थानों पर समुद्र तट काफी पीछे तक दिखते हैं। 

   शायद यही कारण है कि गोवा के कई स्थानों को आज भी वाणावली एवं वाणस्थली कहा जाता है। करीब 3702 वर्ग किलोमीटर दायरे में फैला गोवा अपनी आगोश में समुद्र तटों का प्राकृतिक सौन्दर्य रखता है। खास यह कि गोवा प्राकृतिक सम्पदाओं की अति समृद्धता रखता है। लौह खनिज गोवा में प्रचुरता से पाया जाता है।

    गोवा का मछली उद्योग तो दुनिया में जाना पहचाना जाता है। वस्तुत: देखें तो गोवा की मुख्य पहचान पर्यटन प्रांत के तौर पर देश में है। गोवा की संस्कृति करीब 450 वर्ष प्राचीन मानी जाती है। 
   गोवा में यूरोपीय संस्कृति का प्रभाव पर्यटक महसूस करते हैं। गोवा में वास्तुकला की विशिष्टता पर्यटकों को मुग्ध कर लेती है। गोवा को कोंकण काशी के नाम से भी जाना पहचाना जाता है। गोवा की यात्रा पर्यटकों को एक खास रोमांचक एहसास कराती है। पर्यटक इस रोमांचक सफर को लम्बे समय तक भूल नहीं पाते।

    गोवा की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट डैबोलिम एयरपोर्ट है। पणजी एयरपोर्ट से भी गोवा की यात्रा की जा सकती है। निकटतम रेलवे स्टेशन वास्को द गामा जंक्शन है। इसके अलावा पर्यटक कोंकण रेलवे का भी उपयोग गोवा की यात्रा के लिए कर सकते हैं। इसके अलावा पर्यटक गोवा की यात्रा सड़क मार्ग से भी कर सकते हैं।
15.299326,74.123993

बक्खाली : अतुलनीय खूबसूरती    बक्खाली को प्रकृति का अति दर्शनीय शहर कहा जाये तो शायद कोेई अतिश्योक्ति न होगी। जी हां, बक्खाली की खूबसूरत...